हाशिया

बीच सफ़हे की लड़ाई

देश के साथ किसका साझा है?

Posted by Reyaz-ul-haque on 2/20/2017 05:58:00 PM


कास्तिय्यो आर्मास, संयुक्त राज्य समर्थित एक फौजी तानाशाह था, जिसने एक फौजी तख्तापलट के बाद सत्ता हथियाते हुए गुआतेमाला पर तीन साल तक हुकूमत की. गुआतेमाला एक लातीनी अमेरिकी देश है, जो प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है और जहां पिछली सदी में अनेक देशों में संयुक्त राज्य की सरपरस्ती में होने वाले फौजी तख्तापलट के सिलसिले की शुरुआत हुई थी. फौजी तख्तापलट एक कार्रवाई है, जिसके जरिए यातना कक्षों में लोकतंत्र को कंपनियों के सांचे में ढाला जाता है. यातना कक्ष किसी मुल्क की आंखों में कटी हुई वो रातें हैं जहां सपनों के अपराधों के लिए देह को सज़ा दी जाती है. सपनों के बारे में लिखना अपनी खोई हुई मासूमियत को याद करना है, एदुआर्दो गालेआनो यहां जिसकी कोशिश कर रहे हैं. जालसाज़ धंधेबाजों को कर अदायगी से छूट दिए जाने के इस दौर में पेश है उनकी किताब  दिआस ई नोचेस दे आमोर ई दे गेर्रास का एक अंश. अनुवाद: रेयाज उल हक

1954 के बीच में संयुक्त राज्य ने न्गो दिन्ह दिएम को साइगॉन की गद्दी पर बिठाया और इसके इंतेजाम किए कि गुआतेमाला में कास्तिय्यो आर्मास विजेताओं की तरह दाखिल हो.

यूनाइटेड फ्रूट कंपनी को उबारने की मुहिम ने एक ही झटके में उन खेतिहर सुधारों को तहस-नहस कर दिया, जिन्होंने इस मुल्क में परती पड़ी हुई कंपनी की जमीन पर दखल करके उसे बेजमीन किसानों में बांट दिया था.

अपने माथे पर इसकी निशानी लिए हुए मेरी पीढ़ी ने अपनी राजनीतिक जिंदगी की शुरुआत की. अपमान और कुछ न कर पाने की बेबसी से भरी वो घड़ियां...मैं उस भारी-भरकम भाषणबाज को याद करता हूं जो हमसे शांत आवाज़ में बातें करता, लेकिन उन्हीं दिनों मोंतेविदेओ में गुस्से से भरे शोर-गुल और बैनरों वाली उस रात को वह अपने मुंह से आग उगलता. “हम जुर्म की जिम्मेदारियां तय करने आए हैं...”

उस वक्ता का नाम था खुआन खोसे आरेवालो. तब मैं चौदह साल का था और उस पल की छाप कभी भी फीकी नहीं पड़ने वाली थी.

आरेवालो ने ही गुआतेमाला में सामाजिक सुधारों का वह सिलसिला शुरू किया जिसको खाकोबो आर्बेन्स ने आगे बढ़ाया और जिसे कास्तिय्यो आर्मास ने खून में डुबो दिया. उसने हमें बताया कि अपनी हुकूमत के दौरान वो तेईस बार मार दिए जाने की कोशिशों से बच निकला था.

बरसों बाद आरेवालो एक सरकारी ओहदेदार बना. वह एक खतरनाक चीज में तब्दील हो चुका था, जिसे अपने अतीत के कारनामों पर पछतावा होने लगा था: आरेवालो जेनेरल आरान्या की हुकूमत में एक राजदूत बन गया, एक सामंती जमींदार, गुआतेमाला का औपनिवेशिक हाकिम, कत्लेआम का कर्ताधर्ता.

जब मुझे यह बात पता लगी, तब मुझे लगा कि मैं एक ऐसा बच्चा हूं जिसके साथ धोखा किया गया था हालांकि मुझे अपनी मासूमियत खोए तब एक अरसा हो गया था.

*

मैं 1967 में गुआतेमाला में मिखांगोस से मिला. पहाड़ों से लौट कर जब मैं शहर वापस आया तो अपने घर में उन्होंने मेरा स्वागत किया. उन्होंने मुझसे कुछ भी नहीं पूछा.

उन्हें गाना, अच्छी शराब पीना और जिंदगी को शिद्दत से जीना पसंद था. नाचने के लिए उनके पास पांव नहीं थे, लेकिन वे दावतों में रंग भरने के लिए अपने हाथों से थाप दिया करते थे.

थोड़े ही समय बात जब आरेवालो राजदूत बना, तब आदोल्फो मिखांगोस कांग्रेस [संसद] के सदस्य थे.

बीतती हुई एक दोपहर, मिखांगोस ने कांग्रेस में एक धांधली के विरोध में अपनी आवाज उठाई. ब्राजील में दो सरकारों को गिरा चुकी हाना माइनिंग कंपनी अपने एक अधिकारी को गुआतेमाला की अर्थव्यवस्था का मंत्री बनवाने में कामयाब रही थी. जल्दी ही एक करार पर दस्तखत किए गए, जिसके बाद हाना, राज्य के साथ मिल कर लेक इसाबेल के किनारे निकेल, कोबाल्ट, तांबे और क्रोम के भंडारों का दोहन कर सकती थी. करार के मुताबिक, राज्य को अपनी कोशिशों के लिए बख्शीश मिलती, जबकि कंपनी को एक अरब डॉलर से ज्यादा की कमाई होती. देश के साझीदार की अपनी भूमिका के तहत कंपनी को कोई आयकर नहीं चुकाना था और वह आधी कीमत पर बंदरगाह का इस्तेमाल कर सकती थी.

मिखांगोस ने विरोध में अपनी आवाज बुलंद की.

इसके थोड़े ही समय बाद, जब वे अपनी प्यूजो पर सवार हो रहे थे कि गोलियों की बौछार ने उनकी पीठ को छलनी कर दिया. अपनी देह में ढेर सारा सीसा लिए हुए अपनी पहियोंवाली कुर्सी से वे नीचे ढह गए.

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  1. 1 टिप्पणियां: Responses to “ देश के साथ किसका साझा है? ”

  2. By Anonymous on March 23, 2017 at 11:42 PM

    EXPOSE THE CONSPIRACY! GOD AND THE DEVIL ARE BACKWARDS!! DON'T LET GUILT-FEELINGS, FEAR AND OTHER KINDS OF EMOTIONAL MANIPULATION RULE YOUR CHOICES IN LIFE!!

    http://joyofsatan.org/
    http://exposingchristianity.org/
    https://exposingthelieofislam.wordpress.com/
    http://www.666blacksun.net/

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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