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बीच सफ़हे की लड़ाई

आया रे मई दिन: विलास घोगरे की आवाज में एक गीत

Posted by Reyaz-ul-haque on 5/01/2015 01:41:00 PM

आज अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस यानी मई दिवस पर कॉमरेड विलास घोगरे का एक गीत, जिसमें वे एक भारतीय मजदूर के बनने और उसके सामंती-औपनिवेशिक शोषण की बात कहते हैं. यह गीत अपने सबसे अच्छे रूप में आनंद पटवर्धन की फिल्म हमारा शहर बंबई में है, यहां पेश है एक दूसरा वर्जन. यह गीत राजीव गांधी के शासनकाल में लिखा गया था. 

 

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  1. 0 टिप्पणियां: Responses to “ आया रे मई दिन: विलास घोगरे की आवाज में एक गीत ”

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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