हाशिया

बीच सफ़हे की लड़ाई

सारा लोहा उन गीतों का

Posted by Reyaz-ul-haque on 3/02/2015 10:33:00 PM

आज कुछ क्रांतिकारी, जनवादी गीत. अलग अलग समय और कार्यक्रमों में रिकॉर्ड किए गए इन गीतों में भारतीय किसान-मजदूर और आदिवासी जनता और महिलाओं की आजादी की आवाज बुलंद हुई है. हेम, कबीर कला मंच के साथियों और उन सभी जनवादी कलाकारों के नाम जो आज अपने गीतों की वजह से जेलों में बंद हैं.

जागो रे जागो रे जागो जागो : मुकेश



 

लाल झंडा लेकर कॉमरेड : वासु



 

हम त हईं मजदूर किसान : मुकेश

 


 

भईया हो भईया मजदूर भईया : आरसीएफ 

 

 

तुम्हारे हाथ: आरसीएफ


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  1. 0 टिप्पणियां: Responses to “ सारा लोहा उन गीतों का ”

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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