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बीच सफ़हे की लड़ाई

व्यंग्य के बारे में: जो सैको

Posted by Reyaz-ul-haque on 1/10/2015 12:16:00 AM

जो सैको एक अमेरिकी कार्टून पत्रकार हैं, आज की दुनिया के अग्रणी कार्टूनिस्टों में से एक. सर्बिया, बोस्निया-हर्जेगोविना और फलस्तीन से लेकर भारत तक पर लिखी गई उनकी कार्टून रिपोर्टें इन विषयों पर भारी भरकम शोध ग्रंथों से ज्यादा प्रामाणिक, विचारोत्तेजक और राजनीतिक टिप्पणियों से लैस होती हैं. जो सैको ने जर्नलिज्म, पैलेस्टाइन, डेज ऑफ डिस्ट्रक्शन, डेज ऑफ रिवोल्ट, फुटनोट्स इन गाजा और सेफ एरिया ग्रोशेड जैसी कार्टून कथेतर किताबें लिखी हैं, जिनमें से पैलेस्टाइन की भूमिका प्रो. एडवर्ड सईद ने लिखी थी. 

जो ने फ्रांसीसी व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्दो पर हुए हमले और उसके पत्रकारों-संपादकों की हत्या पर यह कार्टून बनाया है, जो गार्जियन अखबार में छपा है. इस कार्टून में जो सैको, इस घटना के बाद आई प्रतिक्रियाओं में निहित मुसलमान विरोधी उन्माद पर टिप्पणी तो करते ही हैं, वे फ्रांसीसी पत्रिका के राजनीतिक निहितार्थों और उसके व्यंग्य के नस्ली चरित्र के बारे में भी सवाल खड़े करते हैं. वे यह भी पूछते हैं कि क्या आपको इसकी फिक्र नहीं होनी चाहिए कि आपकी कला किसकी सेवा कर रही है? व्यंग्य का काम हड्डियों तक को छेद डालना है, लेकिन किसकी हड्डियों को? 

उनका यह कार्टून कार्ल मार्क्स की उस मशहूर पंक्ति की याद-सी दिलाते हुए पूछता है: क्या यह सोचने की जरूरत नहीं है कि लोग ऐसे कैसे हो गए हैं? और भले ही यह मुश्किल हो लेकिन क्या सवाल इस दुनिया को बदलने का नहीं है? या आपका रास्ता फौरी समाधान वाला है? 

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बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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