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29 जून को दलित दस्तक पत्रिका का दूसरा वार्षिक कार्यक्रम

Posted by Reyaz-ul-haque on 6/26/2014 03:55:00 PM

वंचित तबके की आवाज बन चुकी मासिक पत्रिका दलित दस्तक ने अपने दो वर्ष का सफर पूरा कर लिया है. वैकल्पिक मीडिया को स्थापित करने के इस सामूहिक प्रयास की आवाज को और भी बुलंद और सशक्त बनाने के लिए आगामी 29 जून को पत्रिका के दूसरे वार्षिक समारोह का आयोजन किया जा रहा है. कार्यक्रम  कांस्टीट्यूशन क्लब के डिप्टी स्पीकर हाल में होगा. कार्यक्रम का समय शाम को चार बजे रखा गया है. इस दिन कार्यक्रम को रखने का विशेष कारण बताते हुए पत्रिका के संपादक अशोक दास ने बताया कि इसी दिन सन 1928 में बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर ने समता नाम से पाक्षिक अखबार शुरू किया था.

उन्होंने बताया कि अपने सफर से अब तक पत्रिका लगातार आगे बढ़ रही है. बहुत ही कम संसाधन में शुरू हुई और चल रही इस पत्रिका ने सिर्फ दो साल में 15 राज्यों में 30 हजार पाठकों को जोड़ लिया है. दूसरे वार्षिक कार्यक्रम के संबंध में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें देश भर से दलित दस्तक से जुड़े हुए पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और सोशल एक्टिविस्ट हिस्सा लेंगे. कार्यक्रम में बतौर वक्ता आनंद श्रीकृष्ण (साहित्यकार एवं चिंतक), जयप्रकाश कर्दम (साहित्यकार एवं लेखक) और देवप्रताप सिंह (एक्टिविस्ट) मौजूद रहेंगे. जबकि विशेष अतिथि के तौर पर प्रो. विवेक कुमार (समाजशास्त्री एवं चिंतक, जेएनयू) आदि मौजूद रहेंगे. अन्य उल्लेखनीय अतिथियों में शांति स्वरूप बौद्ध (बौद्ध चिंतक), जे.सी आदर्श (सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व पीसीएस अधिकारी), देवमणि भारतीय (एक्टिविस्ट एवं एआरटीओ, मुजफ्फर नगर) और भड़ास4मीडिया के संचालक यशवंत सिंह मौजूद रहेंगे.
 

गौरतलब है कि दलित दस्तक की स्थापना 27 मई, 2012 को हुई थी. इसके संपादन की जिम्मेदारी संभाल रहे अशोक दास ने एक साहस का परिचय देते हुए वंचित तबके की बात को उठाने का बीड़ा उठाया था. तब से एक पूरी टीम जिसमें जेएनयू के प्रो. विवेक कुमार सहित तमाम अन्य बुद्धिजीवी एवं अधिकारी शामिल हैं और सांगठनिक रूप से पत्रिका को आगे बढ़ाने में जुटे है. अशोक दास भारत के प्रतिष्ठित पत्रिकारिता संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (आईआईएमसी) के 2005-06 बैच के छात्र हैं. अपने आठ साल के पत्रकारिता कैरियर में उन्होंने लोकमत और अमर उजाला में काम किया है. फिलहाल वह दलित दस्तक के संपादन के साथ-साथ, दलितमत.कॉम नाम की वेबसाइट और दलितमत फाउंडेशन के जरिए वंचित तबके को आगे बढ़ाने की मुहिम में जुटे हैं. वह नागपुर-अकोला से प्रकाशित प्रसिद्ध मराठी दैनिक देशोन्नति (राष्ट्रप्रकाश, हिन्दी) का दिल्ली ब्यूरो भी संभाल रहे हैं.हाल ही में “एक मुलाकात दिग्गजों के साथ” नाम से उनका पहला साक्षात्कार संग्रह प्रकाशित हो चुका है.

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“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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