हाशिया

बीच सफ़हे की लड़ाई

अरविंद केजरीवाल के नाम एक खुला पत्र

Posted by Reyaz-ul-haque on 12/24/2013 03:00:00 AM


अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल के कथित आंदोलनों के बारे में हाशिया की समझ पहले से बहुत साफ रही है-हम इन आंदोलनों का विरोध करते हैं हैं. हमने इन्हें सामंती, ब्राह्मणवादी, विश्व बैंक प्रायोजित सांप्रदायिक फासीवादी आंदोलन के रूप में खारिज किया है. अब जब अरविंद केजरीवाल सरकार बनाने जा रहे हैं और अन्ना हजारे लोकपाल पर संतुष्ट हो गए हैं, इस धुआंधार आंदोलनी दौर का एक चरण खत्म हुआ माना जाना चाहिए. ये आंदोलन भारत के ब्राह्मणवादी-साम्राज्यवाद परस्त राज्य के खिलाफ लोगों के जुझारू गुस्से को भटकाने और उसके राज्य की हिमायत में एकजुट करने की अपनी भूमिका को निबाह चुके हैं. हालांकि आनेवाले दिनों में इनकी सक्रियता बनी रहेगी, और उनके खिलाफ संघर्ष भी.

फिलहाल ई-मेल से हासिल हुआ यह पत्र अरविंद केजरीवाल के नाम.

आआपा से हमारे कुछ सवाल। कल रात (22.12.2013) को हमारी सामाजिक संस्था “We The People of India - हम भारत के लोग” जिसमें दिल्ली के विभिन्न वर्गों से जुड़े लोग शामिल है, ने "आआपा और अरविंद केजरीवाल के नाम खुला पत्र" ईमेल से भेजा था और आज सुबह हमने इसे स्पीड पोस्ट से भी भेजा है। हम सभी  सामाजिक लोग दिल्ली में बनने वाली नई सरकार और उनके नुमाईंदों से यह जानना चहाते है कि वह अपने कार्यकाल में समाज के वंचित शोषित तबके और आम जनता के प्रति अपनी प्रतिबद्ता कैसे सिद्द करेगे। इसी को लेकर हमने कुछ आआपा और उनके नेता केजरीवाल से कुछ सवाल रखे है। हमें उम्मीद है वे इन सवालों का जबाव जरुर देगे।

श्री अरविंद केजरीवाल, 22 दिसम्बर 2013.
आम आदमी पार्टी (आ आ पा),
भूतल , A-119,
कोशाम्बी,
गाज़ियाबाद -201010.

प्रिय अरविंद केजरीवाल जी,

वर्तमान विधानसभा में मिले समर्थन से आप आगामी दिनों में दिल्ली में सरकार बनाने जा रहे हैं और इसके लिए आप सरकार बनाने के लिए आम आदमी पार्टी के दर्शन के अनुरूप आम जनता से राय ले रहे हैं, जो बहुत अनूठा और स्वागतयोग्य कदम है.
आपको भावी मुख्यमंत्री के रूप में देखते हुए हम दिल्ली के विभिन्न वर्ग के आम नागरिक - ‘We The People of India - हम भारत के लोग’ - आपसे हमारी दिन-ब-दिन की ज़िन्दगी से जुड़े चंद सवाल पूछना चाहते हैं.
हमें पूरी उम्मीद है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर अपनी प्रतिबद्धता के अनूरूप आप हम साधारण नागरिकों के प्रश्नों का उत्तर अवश्य देंगे.

धन्यवाद
“We The People of India - हम भारत के लोग”

मूलचंद (रिटायर्ड अधिकारी)
दीपक कुमार (पायलट)
अनीता भारती (लेखिका व सामाजिक कार्यकर्ता)
डॉ. गंगा सहाय मीना (प्रोफेसर)
रत्नेश (सामाजिक कार्यकर्ता)
गुरिंदर आजाद (सामाजिक कार्यकर्ता)
सेवंती (सामाजिक कार्यकर्ता)
राजीव (सामाजिक कार्यकर्ता)
अरुण रूपक (सामाजिक कार्यकर्ता)
डॉ राहुल (चिकित्सक)
धरम सिंह (रिटायर्ड अधिकारी)
दीपक सिंह (वकील)
जयनाथ (रिटायर्ड अधिकारी)
सी बी राहुल (सामाजिक कार्यकर्ता)
सुभाष कुमार (सामाजिक कार्यकर्ता)
तथा अन्य कार्यकर्ता.

निवेदक :
We The People of India - हम भारत के लोग’
C/o कप्तान दीपक कुमार,
C-1/214, दूसरा तल,
जनकपुरी,
दिल्ली - 110058.
आआपा –आम आदमी पार्टी से कुछ सवाल
1. संसद द्वारा लोकपाल विधेयक पारित हो गया है. इस सम्बन्ध में हम जानना चाहते हैं कि जब इस विधेयक के तहत राज्यों को अपने यहाँ लोकायुक्त नियुक्त करने के मामले में नियम में संशोधन करने का अधिकार है, ऐसे में क्या आप दिल्ली में इसके अधीन कोर्पोरेट घरानों, धार्मिक संगठन और एनजीओ, जो की व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार फैलाने में अधिक भूमिका निभाते है, को भी शामिल करना चाहेंगे?

2. आप अपने जन-लोकपाल बिल में दलितों-आदिवासियों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की भागीदारी कैसे सुनिश्चित करेंगे? जन लोकपाल बिल में इन वर्गों के हितो की रक्षा कैसे की जाएगी?

3. आप का कहना है कि आप स्थानीय क्षेत्र के विकास में मोहल्ला समिति और स्थानीय लोगों की राय को ही महत्व देंगे, ना कि कोई निर्णय ऊपर से लागू करेंगे. इस सम्बन्ध में हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि देश की स्वतंत्रता के समय से ही संविधान और समाज में शीत युद्ध चल रहा है, जैसे तमाम सामाजिक बुराइयां जैसे-दहेज, बाल श्रम, लिंग भेद, जाति, अस्पृश्यता आदि को समाज सही मानता आया पर संविधान/क़ानून की नज़र में ये सब अपराध है. ऐसे में यदि आप हर चीज़ में जन भावना के नाम समाज की राय मांगने की नीति की शुरुआत कर देंगे तो क्या भविष्य में ये कथित जन भावना, खाप का रूप लेकर संविधान पर प्रश्न चिन्ह तो नहीं लगा देंगी? इस बाबत हम जानना चाहते हैं कि आप संविधान/क़ानून को महत्व देंगे या आम जनता की राय का नाम लेकर हरियाणा की तरह दिल्ली में भी खाप संस्कृति को बढ़ावा देंगे?

4. बिजली के सम्बन्ध में आपका वादा है, कि आप इसका दाम आधा कर देंगे, पर दिल्ली में जहां बिजली का उत्पादन बहुत ही कम होता वहीँ समाज का उच्च वर्ग एसी, गीज़र, वाशिंग मशीन इस्तेमाल कर बिजली और पर्यावरण को नुकसान पहुचाते हैं, बिजली और पानी कोई असीमित संसाधन नहीं है. बिजली उत्पाचदन के लिए बनाए जाने वाले बांधों से लाखों लोग विस्थासपित होते हैं. बिजली को सस्ताे करने की प्रक्रिया में उन विस्थायपितों के अस्तित्वि का सवाल आपके लिए महत्व.पूर्ण नहीं है? उनमें से बहुत से विस्थाउपित पुनर्वास के अभाव में दिल्लीा का रुख करते हैं. उनके बारे में आपकी क्याे राय और योजना है? साथ ही अमीरों द्वारा बिजली से चलने वाले यंत्रों के अत्येधिक प्रयोग से पर्यावरण को पहुंचने वाले नुकसान के बारे में आपकी क्याे राय और योजना है?

5. यदि आप किसी भी रूप में बिजली की दर कम करेंगे तो इससे होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई किस माध्यम से करेंगे?आम आदमी को सब्सिडी का बोझ न उठाना पड़े इसके लिए क्या आप अमीर या संपन्न वर्ग से टैक्स इत्यादि वसूलेंगे ?

6. आपकी सफलता में ऑटो चालको की बड़ी भूमिका है, पर अक्सर देखने में आया है कि ऑटो चालक मीटर से चलने से मना करते हैं, और कई बार दुगना किराया वसूलते हैं. इन तमाम परेशानियों को देखते हुए पिछली सरकार ने ऑटो चालक पर नियंत्रण, हेड क्वार्टर तक पहुंचाने का यंत्र लगाने की कोशिश की थी, पर ऑटो चालकों के विरोध के चलते यह लागू नहीं हो पाया था, क्या आप आम जनता को ऑटो की तकलीफ से मुक्ति दिलाने के लिए इसे लागु करवाएंगे? ऑटो चालकों के मनमाने रुख के लिए काफी हद तक ‘ऑटो मालिक व ऑटो – वित्तदाता माफिया’ जिम्मेदार है, जिसके चुंगल में ऑटो चालक अक्सर होते हैं. इस माफिया को समाप्त करने के लिए आप क्या करेंगे, जिससे की वास्तव में ऑटो चालाक अपनी मेहनत की कमाई से वंचित न हों?

7. आपने आपके पत्र में ठेका प्रणाली का विरोध किया है, जो बहुत अच्छी बात है, इस सम्बन्ध में हम आपको अवगत कराना चाहते हैं कि दिल्ली मेट्रो व् अन्य संस्थानों में कई ठेका कंपनियों ने ठेका कर्मचारियों के वेतन से पीएफ काटकर पीएफ कमिश्नर कार्यालय में जमा करने के बजाय डकार गयी है. इसके अलावा श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही है जो की कई बार मीडिया में उजागर भी हो चुके हैं, हम आपसे जानना चाहते हैं कि क्या आप ठेका प्रणाली का पूर्णतः अंत करेंगे और दोषी ठेकेदारों पर कठोर कार्रवाई करेंगे? श्रम कानूनों को लागू करवा कर मजदूर वर्ग को सहारा देंगे या मुनाफाखोरो को खुश करेंगे?

8. आप जानते ही हैं कि दिल्ली में ज़मीन की कमी हैं और इसकी कीमत बहुत ज्यादा है, पर यहाँ की प्राइम लोकेशन जैसे अक्षरधाम,लोदी एरिया, क़ुतुब इंस्टीट्यूशनल एरिया, छतरपुर आदि में बड़े भाग पर हिंदू मंदिर और संस्थाओं को ज़मीन दी गयी है, क्या समाज के गरीब वर्ग के हित में इस ज़मीन से मंदिरों का कब्जा हटाकर इसे गरीब वर्ग और जनकल्याण के लिए उपलब्ध करायेंगे? यदि नहीं तो क्यों?

9. आपने यह माना है कि सरकारी स्कूलों में अच्छी शिक्षा नहीं मिलती और आप इसकी गुणवत्ता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, यह बेशक अच्छी बात है पर क्या आप इसके साथ राईट तो एडुकेशन के तहत शहर के निजी स्कूलों में गरीब-दलित के बच्चों का प्रवेश सुरक्षित करेंगे? इस संदर्भ में आपकी क्या कार्य योजना है?

10. आपने सरकारी अस्पतालों में वृद्धि और सुविधाओं को निजी अस्पताल की तरह करने की घोषणा की है, जो बहुत अच्छी बात है, पर क्या आप निजी अस्पतालों में दलित-गरीब तबके के नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था आरम्भ करेंगे? यदि हां तो इसकी रूपरेखा स्पष्ट करे.

11. महिला सुरक्षा आप का अहम मुद्दा रहा है, और ऐसी किसी घटना पर आप प्रदर्शन करते रहे है पर हमने देखा कि दलित-आदिवासी महिलाओ के अत्याचार में आप मौन रहते है, हरियाणा में महिलाओ पर हुए अत्याचार इसका उदहारण है क्या आप बताएँगे कि दलित-आदिवासी महिला अत्याचार के मामले की गंभीरता को देखते हुए एक पृथक दलित-आदिवासी महिला आयोग का गठन करेंगे. यदि नहीं तो क्यों?

12. संविधान-प्रदत्तक अजा/अजजा के लिए आरक्षण व्यकवस्थाप के बारे में आपकी क्या- राय है? दिल्ली सरकार के अधीन एससी/एसटी की खाली पड़ी रिक्तियों और बैकलॉग को भरने के बारे में आपके पास क्याध कार्य-योजना है? (कृपया स्पष्ट जवाब दें)
13. दिल्ली में रह रहे आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं दिया गया है I दूसरे राज्यों से विस्थापित हो कर राजधानी क्षेत्र में आकर बसी अनुसूचित जनजाति की आबादी को दिल्ली में अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्रदान करने और उनको सविंधान प्रदत्त सुविधाए मुहैया कराने के लिए आपकी क्या कार्ययोजना है?

14. केंद्र सरकार ने गैस सिलेंडर से सब्सिडी घटाकर इन्हें मंहगा कर दिया है, इस सम्बन्ध में हम बताना चाहते हैं कि शहर के गरीब, कागज़ात और पैसो के अभाव में गैस कनेक्शन नहीं ले पाते हैं, जिसके चलते उन्हें मार्केट दर से कहीं अधिक दर पर (120 रूपए प्रति किलो) छोटे सिलेंडर भरवाने पर मज़बूर होते हैं, क्या आप गरीब तबको को बिना कागज़ात के रियायती दर पर छोटे सिलेंडर उपलब्ध कराएँगे. यदि हां तो क्या उसका बोझ आम आदमी पे पड़ेगा? अगर नहीं तो कैसे?

15. दिल्ली के तमाम अमीर रिहायशी इलाकों में एलपीजी की सप्लाई के लिए गैस पाईप लाइन बिछी होती है पर जेजे कॉलोनी और गरीब बस्ती में कहीं भी यह सुविधा नहीं है, क्या आप सस्ती दरो पे गरीबों की बस्ती में इसे उपलब्ध करायेंगे? अगर नहीं तो क्यूँ और अगर हां तो कब तक और कैसे?

16. शहर का गरीब तबका सिर्फ सार्वजनिक यातायात के साधनों में ही सफर करता है, पर बसों को अक्सर कार जैसे निजी वाहनों के चलते जाम का सामना करना पड़ता है, और अपना कीमती समय सफ़र में व्यतीत करता है इसके साथ ही अधिक किराये का भुगतान भी करना पड़ता है, क्या आप गरीब वर्ग पर अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए इसके किराए में कमी करते हुए बीआरटीएस सिस्टम लागू करेंगे? निजी वाहनों पे पाबन्दी लगाने के लिए क्या कदम उठाये जायेंगे ?

17. शहर में घरेलू कामगार, शोषण का शिकार होते हैं, क्या आप इनके लिए न्यूनतम वेतन और पीएफ सुनिश्चित करेंगे और इसे लागू कराने के लिए आपके पास क्या कार्ययोजना है?

18. आपकी नज़र में आम आदमी कौन है. कौन से वर्ग आम आदमी की श्रेणी में आते है जिसके मद्देनज़र आप अपनी नीतिया तय करेंगे?

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  1. 2 टिप्पणियां: Responses to “ अरविंद केजरीवाल के नाम एक खुला पत्र ”

  2. By राजन on December 24, 2013 at 9:58 PM

    आप जब उन्हें खारिज ही कर दिए हैं तो फिर सवाल पूछ ही क्यों रहे हैं?आप अपने मिशन में लगे रहिए।अरविंद केजरिवाल ने रोका है आप लोगों को काम करने से?और कमी ही क्या है हमारे समाज में ।सबके सब उन केकडों की तरह हैं जिनमें से एक थोड़ा आगे बढ़ने की कोशिश करता है तो बाकि उसकी टाँग पकड खींच लेते हैं।आप लोगों के रवैये से ही लग रहा है कि आप लोग चाहते ही नहीं कि कोई कुछ करे ।आपको केवल हल्ला करने से मतलब है।आप तो ऐसे सवाल कर रहे हैं मानो केजरिवाल कोई इंसान नहीं बल्कि अवतार है जिसके पास चुटकी बजाते ही हर समस्या का हल है बस वह करना ही नहीं चाहता।और किसकी बात सच मानें आप लोग इन्हें साम्प्रदायिक ब्राह्म्णवादी और वही रुटीन विश्लेषण देते हैं और कथित राष्ट्रवादी और सामंती विचारधारा वाले खुद उन्हें कम्युनिस्ट और अलगाववादियों के समर्थक और सेकुलटेर आदि कहते हैं इसका अर्थ कि समस्या आप दोनों तरह के लोगों के साथ ही है।केजरिवाल सही जा रहे हैं।

  3. By राजन on December 24, 2013 at 10:00 PM

    आप जब उन्हें खारिज ही कर दिए हैं तो फिर सवाल पूछ ही क्यों रहे हैं?आप अपने मिशन में लगे रहिए।अरविंद केजरिवाल ने रोका है आप लोगों को काम करने से?और कमी ही क्या है हमारे समाज में ।सबके सब उन केकडों की तरह हैं जिनमें से एक थोड़ा आगे बढ़ने की कोशिश करता है तो बाकि उसकी टाँग पकड खींच लेते हैं।आप लोगों के रवैये से ही लग रहा है कि आप लोग चाहते ही नहीं कि कोई कुछ करे ।आपको केवल हल्ला करने से मतलब है।आप तो ऐसे सवाल कर रहे हैं मानो केजरिवाल कोई इंसान नहीं बल्कि अवतार है जिसके पास चुटकी बजाते ही हर समस्या का हल है बस वह करना ही नहीं चाहता।और किसकी बात सच मानें आप लोग इन्हें साम्प्रदायिक ब्राह्म्णवादी और वही रुटीन विश्लेषण देते हैं और कथित राष्ट्रवादी और सामंती विचारधारा वाले खुद उन्हें कम्युनिस्ट और अलगाववादियों के समर्थक और सेकुलर छद्मप्रगतिशील आदि कहते हैं इसका अर्थ कि समस्या आप दोनों तरह के लोगों के साथ ही है।केजरिवाल सही जा रहे हैं।

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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