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बीच सफ़हे की लड़ाई

तरुण तेजपाल के घिनौने यौन अत्याचार का दोष तय करो!

Posted by Reyaz-ul-haque on 11/25/2013 10:24:00 PM

तरुण तेजपाल के घिनौने यौन अत्याचार का दोष तय करो!
पीड़ित महिला पत्रकार के पक्ष में न्यायपूर्ण कार्रवाई करो!!
साम्राज्यवादी-सामंतवादी संस्कृति को ध्वस्त करो!!

पिछले दो वर्षों में महिला की सुरक्षा की जितनी दावेदारी राज्य सरकारों और संसदीय पार्टियों ने किया है उससे कई गुना महिला उत्पीड़न की घटनाएं घटीं। पिछले दिसम्बर में बलात्कार की हुई घटना से दिल्ली ही नहीं पूरा देश सड़क पर उतर पड़ा था। इसके बावजूद न तो बलात्कार की घटनाओं में कमी आ रही है और न ही उत्पीड़न की घटनाओं में गिरावट का संकेत मिल रहा है। यह तकलीफदेह हालात एक रोजमर्रा की खबर और जीवनचर्या का हिस्सा बनता हुआ लग रहा है। मानो यह सब कुछ होना समाज का अनिवार्य हिस्सा हो। किसी सांसद, विधायक, नौकरशाह आदि का इस तरह की घटनाओं में लिप्त होना इस तरह के विचार को बनाने में न केवल मदद करता है बल्कि इस तरह के घिनौने समाज विरोधी कार्य को वैधानिकता भी प्रदान करता है। एक मीडियाकर्मी की लिप्तता इस भयावह स्थिति का एक ऐसा नमूना है जिसके नीचे वर्तमान साम्राज्यवादी-सामंतवादी आर्थिक-सामाजिक ढांचा सड़ रहा है और जिसका खामियाजा पूरा समाज और महिलाएं भुगत रही हैं।

तरुण तेजपाल, मुख्य संपादक, तहलका ने गोवा में अपनी पत्रिका द्वारा आयोजित ‘थिंक फेस्टिवल’के दौरान अपनी पत्रिका की एक पत्रकार का जिस तरह लगातार यौन अत्याचार किया है वह शर्मनाक और उत्पीड़ित महिला और समाज के प्रति घोर अपराध है। यह महिला पत्रकार तरुण तेजपाल की बेटी की मित्र है और वह उसी की उम्र की है। ‘थिंक फेस्टिवल’का आयोजन खनन कारपोरेशन्स और माफिया के सहयोग से करने वाले तरुण तेजपाल खुद को ‘लोकतंत्र’के झंडाबरदार के तौर पर पेश करते रहे हैं। पत्रकारिता के पेशे में तहलका कायम करने के लिए स्टिंग ऑपरेशन के दौरान महिलाओं का ‘कॉलगर्ल’के तौर पर इस्तेमाल के दौरान भी उनपर कई आरोप लगे थे। पत्रकारिता और नैतिकता की बहस में यह मसला उस समय दब गया और उन महिलाओं के प्रति किए गए अपराध को न्याय के दायरे से ही नहीं पत्रकारिता की नैतिकता से भी बाहर ही रखा गया। उत्पीड़ित पत्रकार महिला और तरुण तेजपाल की बेटी के बीच हुए संदेशों और ई-मेल के माध्यम से तरुण तेजपाल की महिला के प्रति घिनौनी मानसिकता का काफी खुलासा होता है। इस घिनौने अपराध को लेकर तरुण तेजपाल ने जिस तरह बयानों को तोड़ा मरोड़ा है उससे भी उनके अपराध का पक्ष काफी कुछ बाहर आ जाता है। तहलका की प्रबंध संपादक शोमा चौधरी ने जिस तरह महिला विरोधी पक्ष लिया है, बचाव के नाम पर जो कुछ बयान दिया है वह चितंनीय और कथित व्यवसायगत एकता के नाम पर पत्रकारिता को कलंकित करने का भी काम है।

तरुण तेजपाल को बचाने के लिए शोमा चौधरी ने जिस तरह का बयान दिया और माहौल बनाया उसकी वजह से उत्पीड़ित महिला पत्रकार को एक बार फिर यातना से गुजरना पड़ा। इस तरह के बचाव की शह पर तरुण तेजपाल ने पैंतरेबाजी कर उत्पीड़िता को एक बार फिर यातना का शिकार बनाया। पीड़िता को न्याय मिले इसके लिए जरूरी है कि तरूण तेजपाल के घिनौने कृत्य के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई हो और पीड़िता के खिलाफ माहौल बनाने वालों का दोष तय हो।

वैश्वीकरण और नवउदारवादी संस्कृति का जिस तेजी से हमारे सामने एक मॉडल खड़ा हुआ है उसे हम कारपोरेट, संसद व विधायिका, मीडिया और साम्राज्यवादी गिरोहों के गठजोड़ में देख सकते हैं। इस गठजोड़ में अहम हिस्सा है महिला को बाजार में ‘सेक्स ऑब्जेक्ट’के रूप में उतारना। यह साम्राज्यवादी संस्कृति है जिसका गठजोड़ अपने देश में सामंतवादी ब्राह्मणवादी संस्कृति के साथ हुआ है। मीडिया संस्थानों के मालिकों, प्रबंधकों, संपादकों...में मुनाफे की होड़, संपदा निर्माण और सत्ताशाली होने का लोभ-लालच पत्रकारिता, लोकतंत्र, संस्कृति, आधुनिकता, जीवनशैली आदि आवरण में खतरनाक रूप से ऐसी संस्कृति को पेश कर रहा है जो पूरे समाज और महिला के लिए भयावह स्थिति बना रहा है। महिला उत्पीड़न का बढ़ता फैलाव और उच्चवर्गों का खुलेआम हिंसक व्यवहार एक ऐसी चुनौती है जिसे रोकने के लिए सामाजिक-आर्थिक-सांस्कृतिक मोर्चों पर संघर्ष को तेज करना होगा।

क्रांतिकारी जनवादी मोर्चा (आरडीएफ) तहलका में काम करने वाले आम पत्रकार और पीड़िता जिन्होंने तरुण तेजपाल के खिलाफ बोलने का साहस किया के साथ अपनी एकजुटता प्रकट करता है। क्रांतिकारी जनवादी मोर्चा (आरडीएफ) पीड़िता के पक्ष में न्याय की लड़ाई और दोषी को सजा दिलाने के संघर्ष में अपनी भागीदारी प्रस्तुत करता है।

वरवर राव
जीएन साईबाबा

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  1. 1 टिप्पणियां: Responses to “ तरुण तेजपाल के घिनौने यौन अत्याचार का दोष तय करो! ”

  2. By pradumm kumar singh on November 26, 2013 at 7:39 AM

    पूँजीवादी तथाकथित समाज के ठेकेदारो द्वारा गठित ताना बाना ही समाज में फैल रहे कृत्यो के लिये जिम्मेदार है और नवधनाढ्यवर्ग उसमे आग में घी डालने का कार्य करता है संचार क्रान्ति ने मानो इस क्रान्ति को आगे बढाने अपनी सवारी उपलब्ध कराने का कार्य किया है |

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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