हाशिया

बीच सफ़हे की लड़ाई

पृथ्वी के बच्चों के नाम पूर्वज का एक पत्र

Posted by चन्द्रिका on 6/26/2013 09:04:00 PM

“सिएटल का मुखिया” (1780 से 7 जून 1866) अमेरिका की द्वामिष/सुकामिश जनजाति का मुखिया था जिसे सील्थ ,सीथ्ले ,सीथल व सी-अहथ नाम से भी जाना जाता है । संयुक्त राज्य अमेरिका के वाशिंगटन मे स्थित सिएटल शहर का नामकरण इसी के नाम पर हुआ.। अमेरिकी मूलनिवासियों के जमीन के अधिकार व परिस्थितिकी जिम्मेदारियों के संबंध में  विस्तृत रूप से प्रचारित तर्कपूर्ण  भाषण का श्रेय इसे ही दिया जाता है । हालांकि इसके पत्र और भाषण के संबंध में विवाद है कि  वह बाद में अन्य व्यक्तियों द्वारा संपादित हैं। ऐसा कहा जाता है कि सीएटल का मुखिया ,जोकि सुकामिश अमेरिकी मूलनिवासियों का प्रमुख था ने 1800 में अमेरिकी सरकार को यह पत्र लिखा- इस पत्र में  उसने सभी विद्यमान वस्तुओं की सर्वजनीनता व मनुष्य व प्रकृति के अंतर-सम्बन्धों की अत्यंत गहन समझ प्रस्तुत किया । यहाँ यह पत्र दिया जा रहा है जिससे विश्व के हर देश के माँ-बाप और बच्चों के मस्तिष्क व हृदय को शिक्षित किया जाना चाहिए : अनुवाद: प्रेम प्रकाश

सारी जनता के लिए सीएटल के मुखिया  का पत्र

“वाशिंगटन से राष्ट्रपति ने हमें संदेश भेजा है कि वह हमारी जमीन खरीदना चाहते हैं। लेकिन आप धरती का; आसमान का; क्रय –विक्रय कैसे कर सकते हैं? यह विचार हमारे लिए अजीब व विस्मयकारक है । यदि हवा की ताजगी और पानी की चमक हमारी मिल्कियत नहीं है तो आप उसे कैसे खरीद सकते हैं ?

हमारे लोगों के लिए धरती का प्रत्येक भाग पावन है । चीड़ की हर चमकदार नुकीली हरी पत्ती, प्रत्येक समुद्री बलुआ किनारा ,गहरे घने जंगलों का कुहासा , घास का प्रत्येक मैदान,मक्खियों  की भिनभिनाहट ये सब हमारी स्मृति और अनुभव में पवित्र हैं ।

हम पेड़ों में बहते रसों के प्रवाह से ऐसे परिचित हैं जैसे हमारी रगों में बहता हमारा लहू । हम धरती के हिस्से हैं और यह धरती हमारा। सुगंधित पुष्प हमारी बहन है । भालू ,हिरन,महान गरुड़ ये सब हमारे भाई हैं । चट्टानी चोटियाँ ,घास के मैदान की शबनम ,छोटे घोड़ों की गरम शरीर और मनुष्य सब एक परिवार हैं ।

सोतों और नदियों में बहता चमकदार पानी केवल पानी नहीं है ,बल्कि यह हमारे पुरखों का रक्त है । यदि हम अपनी जमीन आपको देते हैं तो आपको याद रखना चाहिए की यह परमपावन है । झील के स्वच्छ पानी में प्रत्येक चमकदार परावर्तन हमारे लोगों की जिंदगी की घटनाओं और स्मृतियों की कहानी कहता है । पानी की कल-कल ध्वनि मेरे पूर्वजों की आवाज है ।

नदियां हमारे भाई हैं । वे हमारी प्यास बुझाती  हैं । वे हमारी डोंगी को खेती हैं और हमारे बच्चों का भरण करती हैं । अतः आपको नदियों से वैसी ही उदारता रखनी चाहिए जैसी आप अपने भाई से रखते हैं ।

यदि हम आपको अपनी धरती देंगे तो याद रखिए कि वायु हमारे लिए अनमोल है, वायु अपनी आत्मा उन सभी ज़िंदगियों में बांटती है जिसे यह सहारा देती है । वायु जिसने हमारे दादा को पहली श्वास दिया उसने ही उनकी अंतिम आह भी ग्रहण किया । हवा ने ही हमारे बच्चों को जीवन का जोश दिया । अतः यदि हम आपको अपनी धरती देते हैं तो उसे इस तरह से पृथक और पवित्र रखना कि वह एक ऐसी जगह हो जहां लोग जा सकें और मैदानों के पुष्पों से मधुसिक्त हवा का स्वाद ले सकें ।

क्या आप अपने बच्चों को वह सिखयेंगे जो हमने अपने बच्चों को सिखाया है? यह कि धरती हमारी माँ है । जो कुछ भी  पृथ्वी के साथ बुरा होता है वह पृथ्वी के सभी संतानों के साथ होता है ।

हम यह जानते हैं कि यह पृथ्वी मनुष्यों की नहीं है बल्कि मनुष्य धरती के हैं । सभी चीजें रक्त की तरह जुड़ी है और हम सभी को एकताबद्ध करती हैं । मनुष्य ने जीवन का जाल नहीं बुना था ,वह मात्र इसका एक रेशा है । जो कुछ भी यह इस जाल के लिए करता है वह उसे स्वयं के लिए करता है ।

हम मात्र इतना जानते है कि हमारा ईश्वर ही आपका ईश्वर है । धरती उसके लिए अनमोल है और धरती को नुकसान पहुंचाना इसके सृजन-कर्ता का सबसे बड़ा तिरस्कार है ।

आपका भाग्य हमारे लिए रहस्य है । क्या होगा जब भैंसों का बध कर दिया जाएगा? जंगली घोड़ों को पालतू बना लिया जाएगा ? क्या होगा जब जंगल के अज्ञात कोने बहुत से आदमियों की गंध से भर जाएंगे और फलदार पहाड़ियों का दृश्य तारों को ले जाने के लिए नष्ट कर दिये जाएंगे? पेड़ों व झाड़ियों के झुरमुट कहाँ विलुप्त हो जाएंगे? गरुड़ कहाँ चले जाएंगे? और तेज रफ्तार छोटे घोड़ों को क्या अलविदा कहा जाएगा, फिर शिकार किया जाएगा? जीवन का अंत और जिंदा रहने के संघर्ष की शुरुआत ।

जब अंतिम रेड मूल-निवासी इस तरह की मरुभूमि द्वारा खत्म किया जा चुका है और उसकी स्मृतियाँ प्रेयरी प्रदेश के ऊपर घूमते बादल की छाया मात्र है , क्या ये समुद्री तट और जंगल यहाँ रहेंगे ? क्या यहाँ मेरे लोगों की आत्मा का एक भी अंश बचेगा ?

हम इस धरती को वैसे ही प्यार करते हैं जैसे एक नवजात अपनी माँ की धड़कन से प्यार करता है । अतः ,यदि हम अपनी जमीन आपको देंगे तो उसे वैसे ही प्यार करिए जैसे हमने इसे प्यार किया है। इसका वैसे ही खयाल रखिए  जैसे हमने इसका खयाल रखा । अपने मस्तिष्क में इस जगह की वैसी ही स्मृतियाँ सहेजिए  जैसी की यह अब हैं जब इसे आप प्राप्त कर रहे हैं। सभी बच्चों के लिए धरती की हिफाजत करिए और इसे प्यार करिए  जैसे ईश्वर हमसे प्यार करता है।

जैसे हम धरती के हिस्से है उसी तरह आप भी धरती के हिस्से हो । पृथ्वी हमारे लिए अनमोल है । यह आपके लिए भी अनमोल है ।

हम एक बात जानते हैं –केवल एक ही ईश्वर है । कोई भी –चाहे वह रेड-मैन हो या ह्वाइट–मैन इसका एक अंग है । आखिरकार हम सभी भाई हैं”।

Related Posts by Categories



Widget by Hoctro | Jack Book
  1. 0 टिप्पणियां: Responses to “ पृथ्वी के बच्चों के नाम पूर्वज का एक पत्र ”

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


फीड पाएं


रीडर में पढें या ई मेल से पाएं:

अपना ई मेल लिखें :




हाशिये में खोजें