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हैदराबाद विस्फोटों में खुफिया एजेंसियों की भूमिका की भी हो जांच: रिहाई मंच

Posted by Reyaz-ul-haque on 2/22/2013 08:18:00 PM

शिंदे बताएं कि हैदराबाद विस्फोट में हिन्दुत्ववादी संगठन जांच के दायरे में क्यों नहीं

लखनऊ/आजमगढ़ 22 फरवरी 2013

रिहाई मंच ने हैदराबाद में हुए विस्फोटों की जांच को गृह मंत्रालय द्वारा गलत दिशा में भटकाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि इस घटना में केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की भूमिका को भी शक के दायरे में लाया जाए। संगठन ने सरकार और खुफिया एजेंसियों को इस मामले आजमगढ़ को बदनाम करने से बाज आने की चेतावनी दी।

रिहाई मंच के प्रवक्ता शाहनवाज आलम और राजीव यादव ने कहा कि एक तरफ तो गृहमंत्री हैदराबाद में इस घटना के पीछे किसी भी आतंकी संगठन का नाम नहीं लेते। लेकिन गृहमंत्रालय के अधीन काम करने वाली खुफिया एजेंसियां मीडिया माध्यमों द्वारा घटना के पीछे इंडियन मुजाहिदीन और लश्कर जैसे तमाम नामों को उछाल कर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ माहौल बना रही हैं। यहां तक कि बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों को आतंकवाद के नाम पर कत्ल करने और फसाने के लिए बदनाम हो चुकी दिल्ली स्पेशल सेल ने इस घटना के बाद आईबीएन 7 चैनल को इरफान लांडजे समेत चार कथित इंडियन मुजाहिदीन के सदस्यों की इंट्रोगेशन रिपोर्ट लीक कर दी। जिसमें यह बताने की कोशिश की गई है कि हैदराबाद विस्फोटों के पीछे इसी कथित संगठन का हाथ है। जबकि लांडजे की फर्जी गिरफ्तारी के मामले में दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक ने नोटिस भेजा है। जाहिर है इस कहानी को जारी करने के पीछे मकसद पूरी घटना की जांच के दायरे से हिन्दुत्ववादी संगठनों को बचाना है, जिन्होंने इससे पहले भी हैदराबाद में दो बार विस्फोट किए हैं।

मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पांडे ने कहा कि जब देश हैदराबाद धमाकों से दहला हो और सरकार आतंकवादियों से निपटने की राजनीतिक इच्छाशक्ति इतनी कमजोर हो कि गृहमंत्री शिन्दे मालेगांव, मक्का मस्जिद, समझौता जैसे आतंकी घटनाओं में लिप्त हिन्दुत्ववादी संगठनों का नाम लेने के बाद भाजपा और संघ के दबाव में पीछे हट जातें हों उस वक्त दिल्ली स्पेशल सेल द्वारा कथित इंन्ट्रोगेशन रिपोर्ट को लीक करना देश को अस्थिर करने का एक कांग्रेसी प्रयास है। ऐसे में इस इन्ट्रोगेशन रिपोर्ट को लीक करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए जांच करवाई जाए कि किस के इशारे पर यह रिपोर्ट लीक की गई। क्योंकि इस रिपोर्ट लीक कांड में पुलिस और आतंकी संगठनों का गठजोड़ सामने आ जाएगा। जैसा कि मालेगांव में हुए विस्फोटों के मामले में सुरक्षा एजेंसियों और हिन्दुत्ववादी संगठनों का गठजोड़ सामने आ चुका है।

आजमंगढ़ रिहाई मंच के संयोजक मसीहुद्दीन संजरी ने कहा कि जिस तरह से मीडिया माध्यमों द्वारा खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां के सूत्रों के हवाले से हैदराबाद विस्फोटों के मामले आजमगढ़ को जोड़ा जा रहा है, उससे इस घटना के पीछे की कांग्रेस की राजनीतिक मंशा समझी जा सकती है कि वह आजमगढ़ का नाम लेकर इस घटना के पीछे खुफिया एजेंसियों और हिन्दुत्ववादी संगठनों पर उठने वाले सवालों को दबाना चाहती है। उन्होंने कहा कि अगर 2014 के चुनावी लाभ के लिए आजमगढ़ को बदनाम करने की कोशिश नहीं रुकी तो कांग्रेस के इस राजनीतिक अपराध का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

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सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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