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बीच सफ़हे की लड़ाई

हम जीतेंगे: फैज की एक नज्म

Posted by Reyaz-ul-haque on 2/13/2013 08:18:00 PM


फैज अहमद फैज की यह नज्म यों तो फलस्तीन की आजादी के मुजाहिदीन के नाम लिखी गई थी, लेकिन यह नज्म पूरी दुनिया की संघर्षशील मेहनतकश जनता की लड़ाइयों के लिए भी उतनी ही प्रासंगिक है. आज फैज को याद करते हुए, पूरी दुनिया की जनता के संघर्षों के नाम, यह नज्म.

एक तराना मुजाहिदीने-फलस्तीन के लिए


हम जीतेंगे
हक्का हम इक दिन जीतेंगे
बिल आखिर इक दिन जीतेंगे
क्या खौफ जि-यलगारे-आ‘दा
है सीना सिपर हर गाजी का
क्या खौफ युरूशे-जैशे-कजा
सफबस्ता हैं अरवाहुल-शुहदा
डर काहे का

हम जीतेंगे
हक्का हम जीतेंगे
कद-जा अलहक्को-जहक अलबातिल
फर्मूदा रब्बे-अकबर
है जन्नत अपने पांवों तले
और साया-ए-रहमत सर पर है
फिर क्या डर है

हम जीतेंगे
हक्का हम इक दिन जीतेंगे
बिल आखिर इक दिन जीतेंगे


हक्का- खुदा की कसम, खौफ जि-यलगारे-आ‘दा- दुश्मन के हमले का डर, सिपर- कवच, युरूशे-जैशे-कजा- मृत्युरूपी सेना की चढ़ाई, सफबस्ता हैं अरवाहुल-शुहदा- शहीदों की रूहें कतार बांधे हुए खड़ी हैं, कद-जा अलहक्को-जहक अलबातिल- मेहनत करने वाला ही सत्य है, नाश करने वाला झूठ है, फर्मूदा रब्बे-अकबर- महान ईश्वर ने कहा है, साया-ए-रहमत- कृपा की छाया

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बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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