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बीच सफ़हे की लड़ाई

बाबरी का पुनर्निर्माण इंसाफ का तकाजा है

Posted by Reyaz-ul-haque on 12/06/2012 01:33:00 AM



बनोज्योत्स्ना की अंग्रेजी कविता का हिंदी अनुवाद. यह उस वादे की याददिहानी के रूप में कि जालिम सल्तनतों ने जनता का अब तक जो कुछ भी तबाह किया है, उसे दलित, आदिवासी, मुस्लिम जनता की नई जनवादी क्रांति फिर से बनाएगी. बाबरी मस्जिद भी उनमें से एक है...तो बूनो की यह कविता. मूल अंग्रेजी कविता यहां पढ़ सकते हैं.


बीस साल
धूल में मिला दिए जाने के बीस साल
मगर अपनी सांसें रोक लो और देखो
यह अब भी वहीं है...
उसकी गुंबदों को धूप अब भी चूमती है

खामोशी को भेदते हुए अजान
उठता है अब भी

बीस साल
लेकिन मुंबई की सड़कों पर
खून के निशान अब भी ताजा हैं

कहते हैं कि वक्त भर देता है घावों को
पर हर गुजरते साल के साथ
हर कत्लेआम के साथ
हर पाखंड
और हर तमाशे के साथ
इंसाफ के चेहरे पर जख्म गहरे होते जाते हैं...
खून की बू तेज होती जाती है

लेकिन अपनी ये मुट्ठियां
बदले और प्रतिरोध की जिद में कसे हुए
हम लड़ेंगे कॉमरेड
क्योंकि इसको छोड़ कोई दूसरा रास्ता नहीं है
और हम लड़ेंगे
आसमान की चादर को बाबरी की गुंबदों से फिर से सजाने के लिए
सफेद कबूतरों की परवाज को बाबरी का आंगन लौटाने के लिए

और इन्कलाब
बनाएगा फिर से
इंसानियत के हर उस टुकड़े को
उन सारी चीजों को
जिन्हें तोड़ दिया गया है

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  1. 0 टिप्पणियां: Responses to “ बाबरी का पुनर्निर्माण इंसाफ का तकाजा है ”

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बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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