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बीच सफ़हे की लड़ाई

कश्मीर-मणिपुर के बलात्कारों पर चुप क्यों रहते हैं आप: अरुंधति रॉय

Posted by Reyaz-ul-haque on 12/22/2012 05:33:00 PM

मैं नहीं मानती कि दिल्ली रेप कैपिटल है. ये रेप तो वर्षों से चला आ रहा है. ये मानसिकता में समाया हुआ है. गुजरात में मुसलमानों के साथ हुआ, कश्मीर में सुरक्षा बल करते हैं बलात्कार, मणिपुर में भी ऐसा होता है लेकिन तब तो कोई आवाज़ नहीं उठाता है.

खैरलांजी में दलित महिला और उसकी बेटी का रेप कर के उन्हें जला दिया गया था. तब तो ऐसी आवाज़ नहीं उठी थी.

एक सामंती मानसिकता है लोगों की जो तभी आवाज़ उठाती है जब बड़ी जाति के, प्रभुत्व वाले लोगों के साथ दिल्ली में कुछ होता है.

आवाज़ उठनी चाहिए. जो हुआ है दिल्ली में उसके लिए हल्ला तो मचना चाहिए लेकिन ये हल्ला सिर्फ मिडिल क्लास लोगों को बचाने के लिए नहीं होना चाहिए.

छत्तीसगढ़ में आदिवासी महिला सोनी सोरी के साथ भी कुछ हुआ था आपको याद होगा तो. उनके जननांगो में पत्थर डाले गए थे.पुलिस ने ऐसा किया लेकिन तब तो किसी ने आवाज़ नहीं उठाई थी. उस पुलिस अधिकारी को तो साहस का अवार्ड मिला.

कश्मीर में जब सुरक्षा बल गरीब कश्मीरियों का रेप करते हैं तब सुरक्षा बलों के खिलाफ़ कोई फांसी की मांग नहीं करता.

जब कोई ऊंची जाति का आदमी दलित का रेप करता है तब तो कोई ऐसी मांग नहीं करता.

इस बार जब सौ सौ लोग इकट्ठा हुए थे दिल्ली में जब लड़की को नंगा फेका गया था बस से बाहर तो लोग खड़े थे. किसी ने अपना कपड़ा दिया उसको. सब लोग खड़े रहे.

दिल्ली में अमीर-गरीब के बीच भेद तो पहले भी था. अब भी है लेकिन अब वो भी निशाना बन रहे हैं. रेप मुद्दा नहीं है. जब देश का विभाजन हुआ था तब कितने रेप हुए थे अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते हम.

एक सामंती मानसिकता है हम लोगों के अंदर.

बलात्कार एक भयंकर अपराध है लेकिन लोग क्या करते हैं. जिस लड़की का रेप होता है उसे कोई स्वीकार क्यों नहीं करता. कैसे समाज में रहते हैं हम. कई मामलों में जिसका बलात्कार होता है उसी को परिवार के लोग घर से निकाल देते हैं.

मेरे पास कोई जवाब नहीं है कि ये सब कैसे ठीक होगा लेकिन मानसिकता की एक बड़ी समस्या है. समाज में बहुत अधिक हिंसा है.

विरोध होना चाहिए लेकिन चुन चुन के विरोध नहीं होना चाहिए. हर औरत के रेप का विरोध होना चाहिए. ये दोहरी मानसिकता है कि आप दिल्ली के रेप के लिए आवाज़ उठाएंगे लेकिन मणिपुर की औरतों के लिए, कश्मीर की औरतों के लिए और खैरलांजी की दलितों के लिए आप आवाज़ क्यों नहीं उठाते हैं.

रेप का विरोध कीजिए इस आधार पर नहीं कि वो दिल्ली में हुआ है या मणिपुर में या किसी और जगह. मैं बस यही कह सकती हूं.  (बीबीसी हिंदी से साभार)

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  1. 1 टिप्पणियां: Responses to “ कश्मीर-मणिपुर के बलात्कारों पर चुप क्यों रहते हैं आप: अरुंधति रॉय ”

  2. By विजय राज बली माथुर on January 2, 2013 at 4:05 PM

    वर्ष 2013 आपको सपरिवार शुभ एवं मंगलमय हो ।शासन,धन,ऐश्वर्य,बुद्धि मे शुद्ध-भाव फैलावे---विजय राजबली माथुर

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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