हाशिया

बीच सफ़हे की लड़ाई

भारत एक हिंदू फासीवादी राज्य है

Posted by Reyaz-ul-haque on 11/02/2012 01:42:00 PM

छात्र संगठन डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स यूनियन (डीएसयू) ने जेएनयू में कल रात में 'Anti-National', 'Seditionist', 'Terrorist', 'Separatist', Maoist: Branding, Persecution and witch-hunt of political voices of the oppressed by the fascist Indian state विषय पर एक पब्लिक मीटिंग आयोजित की. इसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर शम्सुल इस्लाम, वकील और जनवादी अधिकार कार्यकर्ता बोज्जा तारकम और जानेमाने पत्रकार मोहम्मद अहमद काजमी ने बातें रखीं. वक्ताओं ने हिंदू फासीवादी भारतीय राज्य के सांप्रदायिक, फासीवादी, जन विरोधी, दलित-मुस्लिम-पिछड़ा-स्त्री-आदिवासी विरोधी चरित्र के विभिन्न पहलुओं पर अपनी बात रखी. प्रो इस्लाम ने आरएसएस और भारतीय राज्य के गहरे और नजदीकी संबंधों पर रोशनी डालते हुए भारतीय राज्य के हिंदू फासीवादी चरित्र को उजागर किया. बोज्जा तारकम ने कहा कि इस जन विरोधी, ब्राह्मणवादी, फासीवादी राज्य से मुक्ति पाने का उपाय यही है कि दलित, पिछड़े, मुसलिम और आदिवासी अपने जुझारू संघर्षों के जरिए राजनीतिक सत्ता पर कब्जा कर लें.

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता मो. अहमद काजमी थे, जिनको अपनी बेबाक रिपोर्टों और विश्लेषणों की कीमत इस रूप में चुकानी पड़ी है कि उन्हें आतंकवादियों से संबंधों के झूठे आरोप में सात महीनों तक जेल में गुजारने पड़े. वे हाल ही में जमानत पर रिहा हुए हैं. उन्होंने अपने कुछ अनुभव रखे और देश-दुनिया के हालात पर टिप्पणी की. प्रस्तुत है काजमी के भाषण की रिकॉर्डिंग. इसके शुरुआती कुछ सेकेंड रिकॉर्ड नहीं हो पाए हैं.

Related Posts by Categories



Widget by Hoctro | Jack Book
  1. 0 टिप्पणियां: Responses to “ भारत एक हिंदू फासीवादी राज्य है ”

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


फीड पाएं


रीडर में पढें या ई मेल से पाएं:

अपना ई मेल लिखें :




हाशिये में खोजें