हाशिया

बीच सफ़हे की लड़ाई

जगनमोहन रेड्डी यानी भारत में मीडिया सिर्फ कॉरपोरेट का नहीं है (भाग-3)

Posted by चन्द्रिका on 6/01/2012 06:35:00 PM

अपवाद नहीं, नियम हैं साक्षी 
-दिलीप खान
क्रमवार लिंक

गुवाहाटी में चलने वाला ऊ लाला एफएम रेडियो द डर्टी
 पिक्चर फिल्म के
गाने  से पहले से बाज़ार में है और लोकप्रिय है
इधर बीच नज़र दौड़ाए तो पत्रकारों को राज्यसभा भेजने का प्रचलन लगातार बढ़ा है। बीते कुछ सालों में बड़े कॉरपोरेट और पत्रकारों की चहलकदमी राज्यसभा के गलियारों में तेज हुई है। चाहे वो सीएमवाईके प्रिंटेक लिमिटेड के मालिक चंदन मित्रा हो चाहे लोकमत न्यूज़ प्राइवेट लिमिटेड के अध्यक्ष विजय दर्डा। पार्टी और विचारधारा अलग-अलग हो सकती है लेकिन प्रचलन एक है। चंदन मित्रा पायनियर के मालिक हैं, जो अंग्रेज़ी और हिंदी में अख़बार निकालने के अलावा पत्रकारिता का एक संस्थान भी चलाते हैं। विजय दर्डा का लोकमत समूह मराठी में लोकमत, हिंदी में लोकमत समाचार और अंग्रेज़ी में लोकमत टाइम्स निकालने के साथ-साथ टीवी-18 समूह के साथ साझा उपक्रम में आईबीएन-लोकमत नाम से मराठी न्यूज़ चैनल भी चलाता है। व्यवसाय, राजनीति और मुनाफे के शुद्ध मिश्रण के तले नेता मीडिया मंडी में उतर रहे हैं। कांग्रेस के रसूखदार नेता राजीव शुक्ला अपनी पत्नी अनुराधा प्रसाद के साथ ब्रॉडकास्ट इंडिया लिमिटेड के तहत न्यूज़ 24 टीवी चैनल चलाने के साथ-साथ एक स्वतंत्र प्रोडक्शन हाउस भी चलाते हैं। बीएजी फिल्म्स एंड मीडिया लिमिटेड नाम का यह प्रोडक्शन हाउस टीवी धारावाहिक की दुनिया में काफ़ी मशहूर है। इसके अलावा आपनो 24, ई 24 नाम के चैनल और रेडियो धमाल भी राजीव शुक्ला और अनुराधा प्रसाद की ही मिल्कियत है। इंटरनेशनल स्कूल ऑफ मीडिया एंड इंटरटेनमेंट इंस्टीट्यूट के बैनर तले वो मीडिया कर्मियों को प्रशिक्षण भी देते हैं। अतिरिक्त सूचना यह है कि अनुराधा प्रसाद रिश्ते में बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद की बहन है। राजीव शुक्ला टीवी में हाथ आजमाने के साथ ही बेशुमार पैसा वाले धंधा क्रिकेट में भी खासा रुचि रखते हैं। बीसीसीआई में कई महत्वपूर्ण ओहदा संभावलने के अतिरिक्त अभी-अभी संपन्न आईपीएल के वो कमीश्नर (अध्यक्ष) थे। कमीश्नर यानी ललित मोदी वाला पद।  पीवी नरसिंहा राव की सरकार में मंत्री रह चुके हरियाणा के कांग्रेस नेता विनोद शर्मा इनफॉरमेशन टीवी प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी के बड़े शेयरधारक हैं। यही कंपनी हमारे बीच इंडिया न्यूज़ नाम का टीवी चैनल और आज समाज नाम का अख़बार लेकर आती है।
राजनेताओं के साथ मीडिया के गठजोड़ की जब भी चर्चा उठती है लोग दक्षिण भारत का नाम ले लेते हैं। यह ज़रूर है कि दक्षिण भारत में यह प्रचलन ज़्यादा वृहद और पुराना है लेकिन कमोबेस यह प्रैक्टिस भारत के हर कोने में समान है। पता नहीं द डर्टी पिक्चर में लिखा गया गाना ऊ ला ला...किससे प्रेरित है, लेकिन इसी नाम का एफ एम चैनल गुवाहाटी में काफ़ी लोकप्रिय है जिसके मालिक कभी कांग्रेस पार्टी की तरफ़ से मंत्री रह चुके, कभी पार्टी ने निष्कासित हो चुके और फिर वापसी कर चुके मतांग सिंह हैं। पॉजिटिव रेडियो प्राइवेट लिमिटेड नाम की उनकी कंपनी रेडियो ऊ लाला चलाती है और पॉजिटिव टेलीविजन प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के बैनर तले मतंग सिंह एन.ई. टीवी, फोकस टीवी, एनई बांग्ला, एनई हाई फाई, हमार और एचवाई टीवी चलाते हैं। कांग्रेस पार्टी की तरफ़ से असम में मंत्री पद पर रहने वाले हेमंत बिश्व शर्मा की पत्नी रिंकी भुयन शर्मा प्राइड ईस्ट इंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड की मालकिन हैं और न्यूज़ लाइव तथा रंग नाम का चैनल चलाती हैं। दशरूपा इंजीनियरिंग एंड पब्लिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड के मालिक अंजन दत्ता अजीर दैनिक नाम का अख़बार चलाते हैं और लोग उन्हें कांग्रेस विधायक के तौर पर भी जानते हैं। असम में ही जनसाधारण प्रिटिंग्स एंड पब्लिशर्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी जनसाधारण अख़बार निकालती है और इसके मालिक रोकिबुल हुसैन हैं जो राज्य में कई बार मंत्री रह चुके हैं। ऐसा नहीं है कि असम में सिर्फ़ कांग्रेस के ही नेता मीडिया में हाथ आजमा रहे हैं बल्कि असम यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के बदरुद्दीन अजमन की कंपनी यूनिटी मीडिया एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड गणाधिकार नामक अख़बार निकालती है। अजमल एयूडीएफ के अलावा दारुल उलूम देवबंद से भी संबंधित हैं और असम के बड़े कारोबारी हैं।
इसलिए मेरी नज़र में मीडिया में नेताओं के निवेश को दक्षिण की परिघटना कहने वाले लोग बड़ी भूल कर रहे हैं। पंजाब दक्षिण में नहीं है और न ही असम, हरियाणा भी दक्षिण का राज्य नहीं है और नागालैंड तो कतई नहीं। नागालैंड के मुख्यमंत्री नीफ्यू रियो नागालैंड फ्री प्रेस नामक कंपनी के भी मालिक हैं जोकि ईस्टर्न मिरर नामक अख़बार निकालती है। जगनमोहन रेड्डी के साक्षी को इसलिए नेता-मीडिया गठजोड़ के बड़े मिसाल के तौर जाना जाता है क्योंकि पांच साल के भीतर ही साक्षी देश के शीर्ष 10 दैनिकों में शुमार हो गया। लेकिन वाईएसआर के गुजरने के बाद साक्षी के रुतबे और बैंक खाते पर भी असर पड़ा। और वित्तीय तौर पर पछाड़ खाने के बाद जब दिसंबर 2011 में साक्षी ने अपनी कीमत 2.50 रुपए से बढ़ाकर 3 रुपए किया तो जगनमोहन रेड्डी ने अख़बार में लिखे गए खत में यह बताने की कोशिश की कि असल में यह पूरा मामला पीले ब्रिगेड की साजिश का नतीजा है। पीला तेलुगुदेशम पार्टी का रंग है और पीले ब्रगेड से यहां आशय टीडीपी के साथ-साथ इनाडु और आंध्र ज्योति अख़बार से है। इससे पहले जून 2009 में साक्षी ने अपनी कीमत 2 से बढ़ाकर 2.5 रुपए किया था। अपनी शुरुआत के वक्त साक्षी की क़ीमत 2 रुपए थी और उस समय जगन रेड्डी विरोधी अख़बारों को लेकर लगातार फिकरे कसते रहते थे कि अगर साक्षी से मुकाबला करना है तो क्यों नहीं वे भी अपनी क़ीमत 2 रुपए कर देते हैं। जगन के इस बात से नाराज होकर आंध्र ज्योति के संपादक राधाकृष्णा ने लिखा था, अगर मैं किसी मुख्यमंत्री का बेटा होता और मेरे पास अनअकाउंटेड धन होता तो मैं मुफ्त में अख़बार बांटता।
कलानिधि मारन: देश में सार्वाधिक वेतन प्राप्त व्यक्ति
मीडिया को लेकर यह प्रतिस्पर्धा आंध्र के कोने-कोने में देखी जा सकती है। लेकिन तमिलनाडु में यह स्थापित सत्य की तरह हो गया है कि हर अख़बार और टीवी चैनल का किसी न किसी पार्टी के साथ गठजोड़ है। बड़े नाम से शुरू करें तो एआईडीएमके की मुखिया और तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता मैविस सैटकॉम लिमिटेड कंपनी की मालकिन हैं और उनकी यह कंपनी अलग-अलग ब्रांड नेम से तमिलनाडु में कई टीवी चैनल चलाती है। जया टीवी, जया मैक्स, जया प्लस और जे मूवीज इनमें प्रमुख हैं। लेकिन जयललिता का मीडिया साम्राज्य कलानिधि मारन के सामने बेहद छोटा है। क्या आपको मालूम है कि भारत में सबसे ज़्यादा वेतन पाने वाला व्यक्ति कौन हैं? अगर आपका उत्तर मुकेश अंबानी है तो आप सामान्य बोध के आधार पर ग़लत दिशा में भटक रहे हैं। सही उत्तर है- कलानिधि मारन।  
कलानिधि मारन देश के सबसे बड़े टीवी समूहों में से एक सन टीवी नेटवर्क लिमिटेड के मालिक हैं। कल रेडियो लिमिटेड, साउद एशिया एफएम लिमिटेड और कल पब्लिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड भी कलानिधि मारन की ही मिल्कियत हैं। अपनी पत्नी सहित वो इन कंपनियों के 77 फ़ीसदी शेयर पर कब्जा रखते हैं। लगभग दर्जन भर से ज्यादा टीवी चैनल उनके नाम हैं। सन टीवी, सन न्यूज़, केटीवी, सन म्यूजिक, चुट्टी टीवी, सुमंगली केबल, आदित्य टीवी, चिंटू टीवी, किरण टीवी, खुशी टीवी, उदय कॉमेडी, उदय म्यूजिक, जैमिनी टीवी, जैमिनी कॉमेडी और जैमिनी मूवीज जैसे टीवी चैनलों के अलावा सूर्या एफएम और रेड एफएम उनका ही है। रेड एफएम, बजाते रहो! तमिल का बड़ा अख़बार दिनाकरण भी कलानिधि मारन ही निकालते हैं। कलानिधि मारन से अगर संक्षेप में आपका परिचय कराएं तो हम कह सकते हैं कि वो डीएमके के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मुरासोली मारन के बेटे और दयानिधि मारन के भाई हैं। इसके साथ-साथ तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि की बहन के वो पोते हैं। लेकिन कलानिधि मारन के मीडिया समूह से एम करुणानिधि पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे, इसलिए उन्होंने कलाइगनार टीवी प्राइवेट लिमिटेड की शुरुआत की और कलाइगनार टीवी के मालिक बन गए। डीएमके के करीबी व्यवसायी एम राजेंद्रन राज टीवी नेटवर्क लिमिटेड में 11 फीसदी शेयरधारक हैं। इस तरह राज टीवी और राज डिजिटल प्लस नामक चैनल भी डीएमके के कब्जे में हैं।
अंबुमनी रामदॉस के पिता और पीएमके प्रमुख एस रामदॉस मक्काल टीवी चलाते हैं और मक्काल थोलई थोडारपु कुझुमम लिमिटेड के वो सबसे बड़े शेयरधारक हैं। कांग्रेस नेता एच. वसंतकुमार भी न्यूज़ मीडिया में सक्रिय हैं। वो तमिलनाडु में वसंत टीवी चलाते हैं। कांग्रेस के ही सांसद और पूर्व मंत्री केवी थंगबालू मेगा टीवी के मालिक हैं। उनकी कंपनी का नाम हैं, सिल्वरस्टार कम्यूनिकेशंस लिमिटेड। कर्नाटक और केरल में भी नेताओं का मीडिया से अच्छी दोस्ती है। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी की पत्नी अनीता कुमारस्वामी कन्नड़ कस्तूरी टीवी चैनल की मालिकन हैं। लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के नेता मुरली (जिनका 2009 में निधन हो गया) केरल में कैराइल टीवी और पीपुल टीवी चलाते थे। मुस्लिम लीग से संबद्ध एम के मुनीर इंडियाविजन नामक टीवी चैनल के मालिक हैं। इसी चैनल की फादर कंपनी इंडियाविजन सैटेलाइट कम्यूनिकेशंस लिमिटेड में केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 20 करोड़ रुपए का निवेश किया है।
बीजू जनता दल के सांसद बैजंत जे पांडा की पत्नी जगी मंगत पांडा ओडिसा टेलीविजन लिमिटेड के तहत चलने वाले ओटीवी की मालकिन हैं। ओटीवी ओडिसा का सबसे लोकप्रिय क्षेत्रीय टीवी चैनल है। पूर्व मुख्यमंत्री जेबी पटनायक के दामाद और उद्योग मंत्री रहे निरंजन पटनायक के भाई सौम्या रंजन पटनायक ओडिसा से निकलने वाले दैनिक अख़बार संबाद, कनक टीवी और रेडियो चॉकलेट के मालिक हैं। ईस्टर्न मीडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी के वो मालिक हैं।
तो जाहिर है कि पूरब-पश्चमि-उत्तर-दक्षिण में मीडिया-राजनेता के बीच के संबंध लगातार गहरे होते जा रहे हैं। जगन रेड्डी के साक्षी पर सीबीआई के कसे गए शिकंजे से इस प्रचलन में कोई कमी आएगी, ऐसा नहीं है। हां, यह ज़रूर है कि मीडिया को विस्तार देने में अब ज़्यादा सावधानी बरती जाएगी। जगन पर कई गंभीर आरोप हैं। कहा जा रहा है कि उन्होंने साक्षी शुरू करने के लिए कई फ़र्ज़ी कंपनियों का सहारा लिया और उन कंपनियों से बरास्ते मॉरिशस आने वाले पैसों को जगति प्रकाशन में झोंका। मॉरिशस टैक्स हैवन कंट्री है, जहां से निवेश करने में भारत सरकार कई करों में छूट देती है और यही वजह है कि ज़्यादातर यूरोपीय और अमेरिकी कंपनियां भारत में निवेश करने से पहले मॉरिशस में एक ठौर ढूंढ़ती है और फिर इधर का रुख करती है। आंध्र ज्योति और इनाडु ने जगन के ख़िलाफ़ शुरू किए गए अभियान में यह भी दिखाया कि किस तरह एपीआईआईसी (आंध्र प्रदेश इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इंडस्ट्रीयल कॉरपोरेशन) के पैसों को जगति प्रकाशन में लगाया गया।

मीडिया एक ऐसा धंधा है जिसके बारे में कई जानकार बताते हैं कि काले धन को सफ़ेद करने में इस कारोबार से बेहतर कोई दूसरा काम नहीं है। 2004 में जगनमोहन रेड्डी जब कडप्पा से चुनाव लड़ रहे थे तो चुनाव अधिकारी को सौंपे गए ब्यौरे में उन्होंने अपनी आमदनी 10 लाख रुपए बताई थी। अगस्त 2011 में जगन ने घोषणा की कि उनके पास 365 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति है। इसके अलावा 41.33 करोड़ रुपए की संपत्ति उनकी पत्नी के नाम अलग से थी। जगन की संपत्ति में वृद्धि दर को अंकगणित के प्रश्न के तौर पर विद्यार्थियों से प्रतियोगिता परीक्षा में पूछा जाना चाहिए। 2004 में 9.18 लाख रुपए से बढ़कर यह 2009 में 77 करोड़ हुई, फिर 2011 में बढ़कर 365 करोड़ हुई। परीक्षार्थी कुल वृद्धि दर की गणना करें! सही उत्तर: 3 लाख 90 हज़ार फीसदी से ज़्यादा। इस दौरान जगन अगर भारत के किसी भी बैंक में वो पैसा जमा किए होते तो हद-से-हद 20 लाख रुपए तक पहुंच पाते। इससे साबित होता है कि बैंक में पैसा रखना प्रगति की राह में रोड़ा है। प्रगति अगर कहीं है तो मीडिया में है

Related Posts by Categories



Widget by Hoctro | Jack Book
  1. 2 टिप्पणियां: Responses to “ जगनमोहन रेड्डी यानी भारत में मीडिया सिर्फ कॉरपोरेट का नहीं है (भाग-3) ”

  2. By Anonymous on June 6, 2012 at 9:51 AM

    Great article dilip. Congrats.

  3. By "Saif" on August 30, 2012 at 11:14 PM

    shandar article and good research lekin mujhe lagta hai punjab reh gya ptc . shayd kuch or bhi

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


फीड पाएं


रीडर में पढें या ई मेल से पाएं:

अपना ई मेल लिखें :




हाशिये में खोजें