हाशिया

बीच सफ़हे की लड़ाई

जीतन मरांडी को तत्काल और बिना शर्त रिहा किया जाए

Posted by Reyaz-ul-haque on 5/14/2012 03:45:00 PM

झारखंड और देश की जनता के संघर्षों के गायक जीतन मरांडी जेल में हैं. अपने ऊपर थोपे गए झूठे मामलों में रिहा हो जाने और जमानत मिल जाने के बावजूद वे जेल में हैं और उन पर नए झूठे मामले थोपे जा रहे हैं. एक तरफ सरकार ने देश की आदिवासी, दलित जनता के संसाधनों को छीन कर कॉरपोरेट कंपनियों को सौंपने के लिए फौज और अर्धसैनिक बलों को तैनात कर रखा है और दूसरी तरफ इस जुल्म के खिलाफ लिखने, बोलने वाले कलाकारों, लेखकों, पत्रकारों को झूठे मामलों में फंसा कर जेल में बंद किया जा रहा है. जीतन ऐसे कलाकारों में से एक हैं. इनके अलावा सुधीर ढवले, कबीर कला मंच के कलाकार और सैकड़ों दूसरे ऐसे ही संस्कृतिकर्मी, लेखक, पत्रकार जेलों में बंद हैं. राजनीतिक कैदियों की रिहाई के लिए बनी कमेटी ने जीतन की रिहाई की मांग करते हुए यह पत्र लिखा है. जीतन इस कमेटी के सचिवों में से एक भी हैं.
प्रति
अर्जुन मुंडा
मुख्यमंत्री,
झारखंड

  • जीतन मरांडी को झारखंड क्राइम कंट्रोल एक्ट 2002 के तहत कठोर निषेधात्मक हिरासत में नहीं डाला जाए
  • जीतन मरांडी को बिना किसी शर्त के तत्काल रिहा किया जाए

हम जन कलाकार जीतन मरांडी को जेल की कैद जारी रखने का सख्ती से विरोध करते हैं और इसके प्रति अपनी चिंता जाहिर करते हैं. जीतन मरांडी सीआरपीपी (CRPP) के सचिवों में से एक हैं. उनको इस तथ्य के बावजूद अभी भी रिहा नहीं किया गया है कि उनको झारखंड उच्च न्यायालय ने मौत की सजा से बरी कर दिया था. उनके खिलाफ मौत की यह सजा कुख्यात चिलकारी मामले में सेशन कोर्ट ने सुनाई थी. परिस्थितियां विषम थीं इसके बावजूद जीतन मरांडी अपनी आवाज को दबा देने की सत्ता की सारी कोशिशों को नाकाम करते हुए बरी हुए. उनको मिली जनता की भारी हिमायत बिना किसी शक के यह साबित करती है कि इस उप महाद्वीप की जनता इंसाफ के लिए संघर्ष को अहमियत देती है.

जीतन को अपने ऊपर थोपे गए सभी चार मामलों में जमानत मिल गई है. इस पर गौर किया जाना चाहिए उन पर तब के दो मामले थोपे गए जब वे जेल में बंद थे. लेकिन वे जमानत पर जेल से बाहर आने ही वाले थे कि कानून की रत्ती भर भी परवाह नहीं करनेवाली झारखंड की निरंकुश सरकार जीतन की आवाज को दबाने के लिए फिर से एक और क्रूर और दमनकारी औजार के साथ सामने आई.

लेकिन हम उस हताश और बेकरारी से भरे तरीकों के प्रति चिंतित हैं, जिनके तहत बदला लेने पर ऊतारू, हिंसक और तानाशाह राज्य ने सारे न्यायसंगत तौर-तरीकों को दफनाते हुए कठोर झारखंड क्राइम कंट्रोल एक्ट (2002) को जीतन मरांडी पर लागू कर दिया है. अंतिम औजार के बतौर झारखंड सरकार द्वारा इस कठोर निषेधात्मक अधिनियम का इस्तेमाल करते हुए जीतन मरांडी को रिहा होने से रोकना दिखाता है कि सरकार एक ऐसे नागरिक के लिए निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार तथा कानूनी उपायों का सहारा लेने के अधिकारों का उसूलों का जरा भी सम्मान नहीं करती, जो उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण के शोर-शराबे के साथ जनविरोधी तीनियों को लागू किए जाने के खिलाफ अपनी आवाज उठा रहा हो.

पब्लिक सेफ्टी एक्ट ऑफ जम्मू एंड कश्मीर और झारखंड क्राइम कंट्रोल एक्ट (2002) जैसे कठोरतम निषेधात्मक कानून अगर एक बार किसी व्यक्ति पर लगा दिए गए तो उसे कम से कम दो साल तक जेल में रखा जा सकता है. इस अधिनियम में उन स्थितियों के बारे में ब्योरा प्रस्तुत करने को कहा गया है, जिनके आधार पर ये प्रावधान किसी पर लागू किए जा सकते हैं. आम तौर पर यह अधिनियम तब लागू किया जाता है, जब एसपी जिला मजिस्ट्रेट से इस प्रावधान को लागू करने की इजाजत लेता है. एसपी को यह दिखाना होता है कि क्यों सरकार के सामने यही एक विकल्प बच गया है, इसके साथ ही उसे प्रशासन को इसके लिए संतुष्ट करना होता है कि कैसे आरोपित व्यक्ति जन-जीवन के लिए सचमुच में खतरा बन गया है. इसे 12 दिनों में मंजूरी मिल जानी चाहिए. इसे राज्य सरकार हाई कोर्ट रैंक के एक जज तथा गृह सचिव की दो सदस्यीय कमेटी के जरिए स्वीकृति देती है.

पहली नजर में जीतन मरांडी पर झारखंड क्राइम कंट्रोल एक्ट (2002) और कुछ नहीं बल्कि राजनीति से प्रेरित कदम है ताकि उनको जेल में बंद रखा जाए. यह अधिनियम जीतन पर ठीक तब लगाया गया जब वे रिहा किए जा चुके थे और अपने ऊपर गलत तरीकों से थोपे गए सारे मुकदमों में जमानत हासिल कर चुके थे और जेल से बाहर निकलने ही वाले थे. इस कठोर कानून को लागू किए जाने का यह समय ही इस बात का सबूत है कि राज्य का यह अनुचित कानून एक नागरिक द्वारा विचार रखने और स्वतंत्र सुनवाई के बुनियादी अधिकारों को नकारने की साजिश है. असल में यह इस देश की फौजदारी न्यायप्रणाली का भी एक निर्मम मजाक है और न्यापालिका पर एक धब्बा है. यह घटना यह भी साबित करती है कि कैसे सत्ता मनमाने तरीके से हरेक कठोर कानून को जीवन और आजीविका के लिए जनता की ईमानदार आवाजों को खामोश करने के लिए इस्तेमाल में लाती है.

हम मांग करते हैं कि :
1.      जीतन मरांडी पर कठोर झारखंड क्राइम कंट्रोल एक्ट (2002) लागू कर उनको जेल में बंद किए रखना खत्म किया जाए
2.      जीतन मरांडी को तत्काल और बिना शर्त रिहा किया जाए

इसकी प्रतियां इनको भी भेजी गईं:

1.      गृह सचिव, झारखंड
2.      गृह मंत्री, झारखंड
3.      मुख्य न्यायाधीश, हाई कोर्ट, झारखंड

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देखिए जीतन का एक गीत
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सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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