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बीच सफ़हे की लड़ाई

जनता के गायक उत्पल को रिहा करो

Posted by Reyaz-ul-haque on 5/14/2012 06:19:00 PM

 23 साल के उत्पल कहां हैं, किसी को नहीं मालूम. एक हफ्ता हुए, उनको झारखंड पुलिस ने उठा लिया और अब तक उनका कहीं पता नहीं है. इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में जिन्होंने उनको जीतन मरांडी और झारखंड की जनता के गीत गाते हुए सुना है, उन्होंने देखा कि उत्पल महज एक गायक भर नहीं है. वे आदिवासी, दलित जनता के संघर्षों के एक सांस्कृतिक प्रतिनिधि भी हैं. और शायद इसीलिए उनको जनता से अलग कर देना मौजूदा व्यवस्था के लिए जरूरी हो गया था. लेकिन तब, जनता के लिए भी जरूरी है कि वह अपनी इस आवाज को वापस हासिल करे. उत्पल की रिहाई की मांग बुलंद करे. एक अपील रिवोल्यूशनरी डेमोक्रेटिक फ्रंट की तरफ से, हाल ही में उत्पल जिसकी कार्यकारिणी के सदस्य चुने गए हैं.


आदिवासी क्रान्तिकारी संस्कृतिकर्मी उत्पल को तुरन्त बेशर्त रिहा करो।
उत्पल को गैरकानूनी हिरासत में रखने के दोषी पुलिसकर्मियों को सजा दो।


आदिवासी क्रान्तिकारी संस्कृतिकर्मी उत्पल, आयु 23 वर्ष, को झारखंड पुलिस ने 7 मई, 2012 को डुमरी पुलिस थाना क्षेत्र में उस समय गैर कानूनी तरीके से हिरासत में ले लिया, जब वह रांची से गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड में बस से जा रहे थे। झारखंड पुलिस ने अभी तक न तो उन्हें रिहा किया है और न किसी अदालत में पेश ही किया है। हैदराबाद में 22-23 अप्रैल, 2012 को सम्पन्न हुए क्रान्तिकारी जनवादी मोर्चा के प्रथम सम्मेलन में उत्पल अखिल भारतीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य चुने गए थे।

उत्पल झारखंडियों के मशहूर क्रान्तिकारी सांस्कृतिक संगठन झारखंड एभेन में काम कर रहे हैं। सांस्कृतिक कार्यकर्ता जीतन मरांडी की गिरफ्तारी के बाद से उत्पल ही इस संगठन का संचालन कर रहे हैं। वे एक गायक और गीतकार हैं। वे झारखंड एभेन की स्थानीय टीम से मुलाकात करने के लिए ही रांची से डुमरी जा रहे थे। गांव में पहुंचने से पहले ही 7 मई की शाम 3 बजे पुलिस ने उन्हें बस से अगवा कर लिया।

यह पहली बार नहीं है कि उत्पल को पुलिस ने गैरकानूनी हिरासत में लिया हो। जीतन मरांडी की गिरफ्तारी के कुछ माह बाद ही पुलिस ने गुंडों के जरिए उत्पल को अगवा कर लिया था तथा कई दिनों तक उसकी भनक तक नहीं लगने दी थी। बाद में उन पर फर्जी मुकदमा बनाकर जेल में बंद कर दिया। कई माह बाद उन्हें हाईकोर्ट से जमानत मिली। परन्तु जेल से रिहाई के पूर्व ही पुलिस ने उन पर दमनकारी कानून गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम ( यूएपीए) के तहत केस दर्ज कर दिया और उन्हें इस खतरनाक कानून की विभिन्न प्रावधानों के तहत साल भर क्रूर और अन्यायपूर्ण कारावास झेलनी पड़ी। उत्पल हाल ही में जमानत पर जेल से रिहा हुए थे। जेल से आते ही उन्होंने जीतन मरांडी की मौत की सजा के खिलाफ अभियान में सक्रिय भूमिका अदा की थी।

आरडीएफ अपने कार्यकारिणी सदस्य उत्पल को झारखंड पुलिस द्वारा गैरकानूनी हिरासत में रखने की भर्त्सना करता है और मांग करता है कि उन्हें तुरन्त बेशर्त रिहा किया जाए। हम सभी जनवादी संगठनों और बुद्धिजीवियों से अपील करते हैं कि झारखंड पुलिस की इस गैरकानूनी कार्रवाई के खिलाफ आवाज बुलंद करें और दोषी पुलिस कर्मियों को सजा देने की मांग करें।

अध्यक्ष
वरवर राव

महासचिव
राजकिशोर


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सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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