हाशिया

बीच सफ़हे की लड़ाई

सुनिएः क्रांतिकारी गायक गदर का एक और गीत

Posted by Reyaz-ul-haque on 5/20/2011 02:32:00 AM

शायद यह गीत आंसुओं के बारे में है. या शायद खून के बारे में. या शायद पसीने के बारे में. हो सकता है कि यह लड़ाई के लिए जाते साथी के लिए विदाई का गीत हो या यह भी हो सकता है कि शहीद हुए किसी परिजन की याद में गाया जा रहा गीत. खेतों में काम करते हुए, कारखानों में पसीना बहाते हुए, अपने औजारों पर धार चढ़ाते हुए या अपने हथियारों को तेज करते हुए...भाषा इस गीत को समझने में सबसे बड़ी बाधा है और नहीं भी है. सुन कर देखिए और यकीन कीजिए. गदर के गीत और संगीत की सारी खूबियों को आप इसमें महसूस कर सकते हैं. आप अपने आपको करुणा, दर्द और आक्रोश के शिखर पर पाएंगे.

गदर का एक और गीत.


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सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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