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बीच सफ़हे की लड़ाई

तिरुपुर में मजदूरों की आत्महत्याओं पर एक रिपोर्ट

Posted by Reyaz-ul-haque on 5/21/2011 02:14:00 PM

तमिलनाडू का तिरुपुर निर्यात के लिए तैयार किए जानेवाले अपने ब्रांडेड कपड़ों के उत्पादन के लिए जाना जाता है. लेकिन पिछले कुछ समय में तिरुपुर की फैक्टरियों में मजदूरों की आत्महत्याओं का उत्पादन हो रहा है. अमानवीय उत्पीड़न और शोषण की इस दास्तान का ताना-बाना जिन रेशों से बुना गया है, उनकी पहचान करने के लिए कुछ छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की एक टीम मार्च के पहले हफ्ते में तिरुपुर गई थी. इस यात्रा के दौरान टीम ने जो कुछ देखा और वह जिन नतीजों पर पहुंची है, उसे एक रिपोर्ट की शक्ल में जारी करने वाली है. इसका विवरण नीचे है. साथ में, हम इस रिपोर्ट का एक हिस्सा भी प्रस्तुत कर रहे हैं.

तिरुपुर रिपोर्ट को जारी किए जाने के मौके पर 
वहां हो रही आत्महत्याओं के बारे में चर्चा के लिए
 आमंत्रण
स्थान : गांधी शांति प्रतिष्ठान, नई दिल्ली (आईटीओ के नजदीक)
समय : 22 मई, 2011, 11 बजे दिन से 3 बजे तक
पिछले दिनों तिरुपुर से स्तब्ध कर देने वाली खबरें आई हैं। वहां सैकड़ों की संख्या में मजदूरों ने आत्महत्याएं की हैं। यहां की हालत कुछ दूसरी ही है। यह विफलता का मारा विदर्भ का कपास उत्पादक उजाड़ क्षेत्र नहीं, बल्कि कामयाबी से भरा दमकता तिरुपुर है जो कपड़ा उत्पादक हब के रूप में जाना जाता है। और ऐसी समृद्‌ध जगह में मजदूरों की आत्महत्या का सिलसिला चल रहा है। मार्च महीने में एक फैक्ट फाइण्डिंग टीम तमिलनाडु के तिरुपुर गई थी। उसने कुछ तथ्यों को इकट्‌ठा किया है। हम जिन नतीजों पर पहुंचे हैं और हमारे जो अवलोकन रहे हैं, उन्हें हम आपके साथ साझा करना चाहते हैं।
   
हम आपको चर्चा के लिए आमंत्रित करते हैं। हम आपके सक्रिय भागीदारी की आशा करते हैं।

संतोष कुमार
कमिटी ऑफ कनसर्न्ड सीटिजन-स्टूडेन्ट्‌स एण्ड यूथ की ओर से

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सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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