हाशिया

बीच सफ़हे की लड़ाई

भारत अभिजातों का लोकतंत्र हैः अरुंधति राय

Posted by Reyaz-ul-haque on 5/23/2011 03:15:00 AM

भारत सरकार आदिवासी इलाकों में सेना के आधार कैम्प बनाने जा रही है. ऐसे दो ट्रेनिंग कैम्प उड़ीसा के रायगढ़ा व छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिलों में जल्दी ही स्थापित करने की योजना है, जिसके लिए बड़ी मात्रा में आदिवासी जमीन का अधिग्रहण किया जाने वाला है. अबूझमाड़ के कुल क्षेत्रफल 4000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का 600 वर्ग किमी सेना को बेस कैम्प के लिए सौंपा जा रहा है. इतने बड़े इलाके में सेना के आने से स्थानीय लोगों का विस्थापन व जंगल की तबाही होना तय है. सेना के अनुसार ही ये तथाकथित कैम्प मिजोरम व कांकेर के जंगल युद्ध प्रशिक्षण स्कूल के माडल पर ही स्थापित किये जा रहे हैं. सरकार के इस कदम का विरोध करने के लिए देश के कुछ जाने-माने बुद्धिजीवी और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने शनिवार को गांधी शांति प्रतिष्ठान में एक बैठक की. फोरम अगेंस्ट वार ऑन पीपुल के तहत आयोजित इस आम सभा में लोगों ने एकस्वर से इस जनविरोधी दमनकारी कदम का विरोध किया और यह आशंका भी जतायी कि इसके जरिए सरकार संघर्षरत जनता के खिलाफ सेना के औपचारिक इस्तेमाल का रास्ता साफ कर रही है.

इस मौके पर अर्थशास्त्री अमित भादुड़ी, कवि मदन कश्यप, लेखिका अरुंधति राय, पूर्व न्यायाधीश राजेंद्र सच्चर, सीपीआई के महासचिव एबी वर्धन, मेनस्ट्रीम के संपादक सुमित चक्रवर्ती और समयांतर के संपादक पंकज बिष्ट समेत इस सभा में शामिल सभी वक्ताओं ने यह मांग की कि जनता के खिलाफ सभी युद्धों को तत्काल बंद किया जाए, कंपनियों के साथ किये गये सारे करारों को सार्वजनिक करके रद्द किया जाये तथा सारे अर्धसैनिक बलों को वापस बुलाया जाये.

हाशिया  पर इस कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग अलग-अलग हिस्सों में पोस्ट की जायेगी. इस सिलसिले में पेश है जानी-मानी लेखिका अरुंधति राय का वक्तव्य. इसमें अरुंधति ने सरकार के इस दमनकारी कदम का आरंभ से ही मजबूत विरोध करने और इसे शुरू न होने देने के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया है.

सुनिए.

Related Posts by Categories



Widget by Hoctro | Jack Book
  1. 3 टिप्पणियां: Responses to “ भारत अभिजातों का लोकतंत्र हैः अरुंधति राय ”

  2. By हमारीवाणी on May 23, 2011 11:43 AM

    क्या आप हमारीवाणी के सदस्य हैं? हमारीवाणी भारतीय ब्लॉग्स का संकलक है.


    अधिक जानकारी के लिए पढ़ें:
    हमारीवाणी पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि


    हमारीवाणी पर ब्लॉग प्रकाशित करने के लिए क्लिक कोड लगाएँ

  3. By Himanshu Kumar on May 26, 2011 10:45 PM

    'भारत अभिजातों का लोकतंत्र है ' (भैय्या , सर्वहारा का भी कोई लोकतंत्र कहीं पर हो तो हमें भी बता दीजिये!)

  4. By Anonymous on July 17, 2011 9:31 AM

    ..और अरुन्धति "पेज थ्री" आन्दोलनकारी।

सुनिए : हम देखेंगे/इकबाल बानो

बीच सफ़हे की लड़ाई

गरीब वह है, जो हमेशा से संघर्ष करता आ रहा है. जिन्हें आतंकवादी कहा जा रहा है. संघर्ष के अंत में ऐसी स्थिति बन गई कि किसी को हथियार उठाना पड़ा. लेकिन हमने पूरी स्थिति को नजरअंदाज करते हुए इस स्थिति को उलझा दिया और सीधे आतंकवाद का मुद्दा सामने खड़ा कर दिया. ये जो पूरी प्रक्रिया है, उन्हें हाशिये पर डाल देने की, उसे भूल गये और सीधा आतंकवाद, ‘वो बनाम हम ’ की प्रक्रिया को सामने खड़ा कर दिया गया. ये जो पूरी प्रक्रिया है, उसे हमें समझना होगा. इस देश में जो आंदोलन थे, जो अहिंसक आंदोलन थे, उनकी क्या हालत हमने बना कर रखी है ? हमने ऐसे आंदोलन को मजाक बना कर रख दिया है. इसीलिए तो लोगों ने हथियार उठाया है न?

अरुंधति राय से आलोक प्रकाश पुतुल की बातचीत.

फीड पाएं

रीडर में पढें या ई मेल से पाएं:
अपना ई मेल लिखें :

कॉरपोरेट जगत के हित में देश की आम जनता के संहार की योजना रोकें

हम महसूस करते हैं कि यह भारतीय लोकतंत्र के लिए एक विध्वंसक कदम होगा, यदि सरकार ने अपने लोगों को, बजाय उनके शिकायतों को निबटाने के उनका सैन्य रूप से दमन करने की कोशिश की. ऐसे किसी अभियान की अल्पकालिक सफलता तक पर संदेह है, लेकिन आम जनता की भयानक दुर्गति में कोई संदेह नहीं है, जैसा कि दुनिया में अनगिनत विद्रोह आंदोलनों के मामलों में देखा गया है. हमारा भारत सरकार से कहना है कि वह तत्काल सशस्त्र बलों को वापस बुलाये और ऐसे किसी भी सैन्य हमले की योजनाओं को रोके, जो गृहयुद्ध में बदल जा सकते हैं और जो भारतीय आबादी के निर्धनतम और सर्वाधिक कमजोर हिस्से को व्यापक तौर पर क्रूर विपदा में धकेल देगा तथा उनके संसाधनों की कॉरपोरेशनों द्वारा लूट का रास्ता साफ कर देगा. इसलिए सभी जनवादी लोगों से हम आह्वान करते हैं कि वे हमारे साथ जुड़ें और इस अपील में शामिल हों.
-अरुंधति रॉय, नोम चोम्स्की, आनंद पटवर्धन, मीरा नायर, सुमित सरकार, डीएन झा, सुभाष गाताडे, प्रशांत भूषण, गौतम नवलखा, हावर्ड जिन व अन्य

हाशिये में खोजें

Loading...