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बीच सफ़हे की लड़ाई

भारत अपनी महान भूमिः सुनिए गदर के कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग

Posted by Reyaz-ul-haque on 5/21/2011 11:46:00 AM

पिछली पोस्टों में क्रांतिकारी गायक गदर के जेएनयू में हुए कार्यक्रम का जिक्र भर हुआ था. अलग तेलंगाना राज्य की मांग के समर्थन में बनी छात्रों की कमेटी (स्टूडेंट्स सोलिडेरिटी कमेटी फॉर सेपरेट स्टेट ऑफ तेलंगाना) द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में गदर ने आमतौर पर भारत और खासतौर पर तेलंगाना की मेहनतकश जनता के अंतहीन शोषण, दमन और उत्पीड़न के लिए स्थापित फौजी और संरचनात्मक हिंसा की राजकीय संस्थाओं के बारे में बताया. उन्होंने इस हिंसक भारतीय राज्य की संरचना के खिलाफ संघर्ष कर रही जनता की कहानी भी कही. औपनिवेशिक शासन काल से लेकर मौजूदा अर्ध औपनिवेशिक -अर्ध सामंती राज्य के चरित्र को गदर ने अपने गीतों के जरिए पेश किया.

इस कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग टुकड़ों-टुकड़ों में पेश की जाएगी. सबसे इस कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग का एक हिस्सा, जिसमें गदर ने नागार्जुन सागर बांध के जरिए तेलंगाना के मजदूरों और किसानों के साथ भेदभाव और उनकी बरबादी की कहानी कही है. तेज हवा और खराब माइक के कारण रिकॉर्डिंग की क्वालिटी बहुत अच्छी नहीं है, और इसे कंप्यूटर पर संपादित करने के बाद थोड़ा सुनने लायक बनाया जा सका है.

सुनिएः भारत अपनी महान भूमि


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सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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