हाशिया

बीच सफ़हे की लड़ाई

देखो रे देखो भइया अमरीका वाला आता: सुनिए गदर को

Posted by Reyaz-ul-haque on 5/20/2011 01:44:00 AM

कुछ ही देर पहले गदर यहां से गए हैं. उनके जाने के बाद कुछ भी कहा जाना बाकी नहीं रह गया है. जो कहा जाएगा और जो भी पढ़ा जाएगा वह जेएनयू के केसी-ओएटी में दो घंटे के उनके सांस्कृतिक कार्यक्रम के असर की दूर दूर तक भी बराबरी नहीं कर सकेगा. गदर अलग तेलंगाना राज्य की मांग के लिए जारी आंदोलन के सिलसिले में दिल्ली में आये थे और जेएनयू में अलग तेलंगाना राज्य के समर्थन में बनी छात्रों की समिति द्वारा आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में शिरकत करने आये थे. देश के मेहनतकश मजदूरों के खून और पसीने की गंध समोए गदर के गीत हमें एक ऐसी दुनिया में पहुंचाते हैं जहां हम श्रम के शोषण और संघर्ष को संगीत में महसूस कर सकते हैं. कारखाने में पसीना बहाते मजदूर की व्यथा हो या क्रांतिकारी संघर्षों में शामिल युवाओं के उम्मीद भरे सपने हों गदर उन्हें आवाज देते हैं. उनके गीतों में हथियारों और औजारों दोनों की खनक मिलेगी.

उनके बारे में कांचा इलैया का कहना है, 'गदर तेलंगाना के पहले बुद्धिजीवी हैं, जिन्होंने उत्पादन में लगी जनता और साहित्यिक रचनाओं के बीच संबंध स्थापित किया.'

हैदराबाद के पास मेदक जिले में तूपरन गांव में एक दलित परिवार में जन्मे गदर का असली नाम गुम्मादी विट्टल राव है. ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ शुरुआती क्रांतिक्रारी संघर्षों के लिए जानी जानेवाली गदर पार्टी के सम्मान में उन्होंने यह नाम अपना लिया और गदर बन गये. उस्मानिया विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में छोड़ कर वे नक्सलवादी आंदोलन में शामिल हुए.

गदर अपने क्रांतिकारी गीत और संगीत रचना के लिए जाने जाते हैं. आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ में उनके द्वारा स्थापित सांस्कृतिक संगठन जन नाट्य मंडली ने जन कलाओं के क्रांतिकारी तत्वों को विकसित किया है. यह संगठन एक परिघटना के रूप में स्थापित हुआ है.

गदर के बारे में फिर कभी हाशिया  पर विस्तार से कुछ पोस्ट किया जाएगा. अभी तो गदर का एक मशहूर गीत, फिल्म मा भूमि से.

जिन दिनों पटना में अभियान  के साथ मैंने सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लेना शुरू किया, उन दिनों जो पहला गीत मैंने सीखा था वह गदर के एक गीत का हिंदी संस्करण था-देखो रे देखो भइया अमरीका वाला आता. इस गीत में अमेरिकी साम्राज्यवाद द्वारा बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उत्पादों के जरिए हमारे जीवन को विभिन्न तरीकों से नियंत्रित करने और अपार मुनाफा बटोरे जाने का जिक्र किया गया है. इसमें यह दिखाया गया है कि किस तरह बहुराष्ट्रीय कंपनियां और अमेरिकी सैन्यवाद एक ही साम्राज्यवादी सिक्के के दो पहलू हैं.

प्रस्तुत है मूल तेलुगु गीत.

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  1. 4 टिप्पणियां: Responses to “ देखो रे देखो भइया अमरीका वाला आता: सुनिए गदर को ”

  2. By Anonymous on May 20, 2011 at 10:45 AM

    apki post ke jariye gadar jese adhbhut krantikariyones se milna -----delhi ka hone ki vajaha se mere liye anghey kholne jesa hai----

  3. By Reyazul Haque on May 20, 2011 at 10:53 AM

    Thanks Manoj.

  4. By abhishek nandan on May 21, 2011 at 1:28 AM

    oh..ek naya josh....thanks reyazul bhaiya

  5. By satyendra... on May 21, 2011 at 2:44 AM

    जबरदस्त. इस समर्पित वीर के सम्मान में कहने के लिए कोई सम्मानित शब्द नहीं मिल रहा है...

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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