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बीच सफ़हे की लड़ाई

कृष्ण बलदेव वैद की किताबों का लोकार्पण

Posted by Reyaz-ul-haque on 4/29/2011 11:23:00 PM

कहते हैं कि उनकी कहानियां सार्वजनिकता में निजी स्पेस के निर्माण की कहानियां हैं. उनकी बहुत मशहूर कहानी 'बदचलन' बीवियों का द्वीप हो या फिर हालिया कहानी प्रवास गंगा. कृष्ण बलदेव वैद की कहानियों में मनुष्य नहीं उसका अंतर्जगत, उसके मन के अनछुए कोने नायक होते हैं. नायक थोड़ा आक्रामक लगे तो केंद्रीय चरित्र कह सकते हैं. कल एक साथ पेंगुइन हिंदी से प्रकाशित उनकी दो किताबों का विमोचन है. ये किताबें हैं- खाली किताब का जादू और प्रवास गंगा. पिछले दिनों हिंदी अकादेमी द्वारा दिखाई गयी तानाशाही और अभद्रता के बाद पहली बार वैद जी भारत में किसी सार्वजनिक मंच पर आयेंगे, इसलिए भी यह कार्यक्रम थोड़ा रोचक होगा. किताबों के बारे में और अधिक जानने के लिए यहां क्लिक करें.

लोकार्पण- खाली किताब का जादू और प्रवास गंगा
शनिवार, 30 अप्रैल 2011, शाम 6.00 बजे
लेक्चर हॉल, इंडिया इंटरनेशनल सेंटर एनेक्सी,
लोधी एस्टेट, नई दिल्ली

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  1. 0 टिप्पणियां: Responses to “ कृष्ण बलदेव वैद की किताबों का लोकार्पण ”

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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