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बीच सफ़हे की लड़ाई

खुद को बेच दिया है उन्होंने अमेरिकी रोटी और हवा के लिए

Posted by Reyaz-ul-haque on 4/28/2011 05:10:00 PM

स्पेनिश सीखते हुए पाब्लो नेरुदा का मूल स्पेनिश से अनुवाद करने की पहली कोशिश की है. नेरुदा ही मुझे जेएनयू लेकर आये और अब जेएनयू के जरिये फिर से नेरुदा को समझ रहा हूं. अब तक हुए अनुवादों की सीमाएं भी दिखने लगी हैं. यह अनुवाद भी बिल्कुल सही है, यह मैं नहीं कह रहा. यह तो आप तय कीजिए. यहां प्रस्तुत पहली कविता नेरुदा की अंतिम कविता है जो उन्होंने अपनी मौत से आठ दिन पहले लिखी थी- वह चिली में सीआईए द्वारा समर्थित जनरल पिनोशे के तख्तापलट का चौथा दिन था और नेरुदा अपनी बीमारी के अंतिम चरण में थे. यह उस कवि का गुस्सा है, जिसने अपनी पूरी जिंदगी मजदूरों के बीच काम करते हुए, अपने और दूसरे देशों में जनवाद के लिए लड़ते हुए और उनके लिए कविताएं लिखते हुए बितायी. नेरुदा सिर्फ अपने पूरे महाद्वीप के प्रतिनिधि कवि ही नहीं थे, वे पूरी लैटिन अमेरिकी जनता के इतिहासकार और राजनेता भी थे. दूसरी कविता नेरुदा ने अपनी पार्टी, चिली की कम्युनिस्ट पार्टी, को समर्पित की है जिसकी केंद्रीय कमेटी के वे वरिष्ठ सदस्य थे.
जागीरदार

निक्सन, फ्रेई, पिनोशे
आज तक, 1973 के
इस कड़वे सितंबर महीने तक
हमारे इतिहास के भूखे लकड़बग्घों
बोर्दाबेर्री, गार्रास्तासु और बेनसेर के साथ मिलकर
कुतर रहे हैं उन झंडों को
जिन्हें जीता गया
इतने सारे खून और इतनी सारी आग से
अपनी जागीरों में कीचड़ में सने
जनता की संपदा के ये नारकीय लुटेरे
हजार बार बिके हुए ये जागीरदार
और बिचौलिये, न्यूयार्क के भेड़ियों की छोड़ी हुई
डॉलर की भूखी मशीनें
अपने ही लोगों की कुरबानियों के
खून से कलंकित
खुद को बेच दिया है उन्होंने
अमेरिकी रोटी और हवा के लिए
बदनाम जल्लाद
जलील तानाशाहों का गिरोह
जिनका लोगों को यातना देने के सिवा
कोई दूसरा कानून नहीं है
और जनता की भूखी दीमकें
 
(15 सितंबर, 1973, चिली)

अपनी पार्टी को
तुमने दिया भाईचारा उन लोगों से जिन्हें मैं नहीं जानता
तुमने भरी मुझमें उन सभी लोगों की ताकत जो जिंदा हैं
मानो एक जन्म में तुमने लौटायी है मेरी मातृभूमि,
तुमने दी है मुझे आजादी जिसे नहीं हासिल कर सकता अकेला आदमी
तुमने सिखायी है मुझे करुणा, आग की तरह
तुमने दी है मुझमें ईमानदारी पेड़ों की तरह
तुमने सिखाया है मुझे इनसानों में एकता और फर्क को देखना
तुमने दिखाया है कि कैसे एक आदमी का दर्द खत्म होता है सबकी जीत से
तुमने सिखाया मुझे सख्त बिस्तर पर सोना, अपने भाइयों की तरह
तुमने खड़ा किया मुझे यथार्थ पर चट्टान की तरह
तुमने बनाया मुझे बुरों का दुश्मन और डरे हुए लोगों का आसरा
तुमने सिखाया दुनिया और खुशी की संभावनाओं को देखना साफ-साफ
तुमने मुझे बनाया नश्वर, क्योंकि तुम हो तो मैं खत्म नहीं हो सकता.
(कान्तो खेनेराल से)

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बीच सफ़हे की लड़ाई

गरीब वह है, जो हमेशा से संघर्ष करता आ रहा है. जिन्हें आतंकवादी कहा जा रहा है. संघर्ष के अंत में ऐसी स्थिति बन गई कि किसी को हथियार उठाना पड़ा. लेकिन हमने पूरी स्थिति को नजरअंदाज करते हुए इस स्थिति को उलझा दिया और सीधे आतंकवाद का मुद्दा सामने खड़ा कर दिया. ये जो पूरी प्रक्रिया है, उन्हें हाशिये पर डाल देने की, उसे भूल गये और सीधा आतंकवाद, ‘वो बनाम हम ’ की प्रक्रिया को सामने खड़ा कर दिया गया. ये जो पूरी प्रक्रिया है, उसे हमें समझना होगा. इस देश में जो आंदोलन थे, जो अहिंसक आंदोलन थे, उनकी क्या हालत हमने बना कर रखी है ? हमने ऐसे आंदोलन को मजाक बना कर रख दिया है. इसीलिए तो लोगों ने हथियार उठाया है न?

अरुंधति राय से आलोक प्रकाश पुतुल की बातचीत.

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