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बीच सफ़हे की लड़ाई

बायोमैट्रिक कार्ड और जाति आधारित जनगणनाः एक असहमति पत्र

Posted by Reyaz-ul-haque on 8/12/2010 01:12:00 PM

कुछ देर पहले दिलीप मंडल के ई-मेल से यह टिप्पणी मिली है.

बायोमैट्रिक डाटा कलेक्शन और नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर से साथ जाति गणना का प्रस्ताव निरर्थक है और इससे सामाजिक-आर्थिक आंकड़े नहीं मिलेंगे।

केंद्र सरकार का यह फैसला बेतुका और निरर्थक है कि बायोमैट्रिक कार्ड बनवाने के लिए आने वालों से उनकी जाति पूछ ली जाएगी। यह बेहद भ्रामक प्रस्ताव है। इस तरह आंकड़ा जुटाने से जाति आधारित जनगणना से हासिल होने वाले ज्यादातर लक्ष्य पूरे नहीं हो पाएंगे। 
जनगणना के फॉर्म में व्यक्ति की सामाजिक आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति को समझने वाले कॉलम होते हैं। इन सूचनाओं के बगैर यूनिक आईडेंटी कार्ड बनाते समय एक अलग फॉर्म में जाति पूछ लेने भर से जाति और उनकी आर्थिक सामाजिक तथा शैक्षणिक स्थिति के अंतर्संबंधों को नहीं समझा जा सकता है।
इस तरह तो पूरी कवायद सिर्फ जाति की संख्या जानने तक सीमित हो जाएगी। इस तरह जाति का आंकड़ा इकट्ठा करने से जातियों औऱ जाति समूहों की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन नहीं हो पाएगा। जनगणना के समाजशास्त्रीय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जाति के प्रश्न को जनगणना के साथ ही पूछा जाना चाहिए।
साथ ही नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर के लिए 15 साल से ज्यादा उम्र वालों की ही बायोमैट्रिक सूचना ली जाएगी। परिवार के बाकी लोगों के बारे में इन्हीं से पूछकर कॉलम भरने का समाधान गृह मंत्रालय दे रहा है, जो अवैज्ञानिक तरीका है।
बायोमैट्रिक और नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर का काम अभी प्रायोगिक स्तर पर है। इससे लेकर विवाद भी बहुत हैं। इसलिए इसके साथ जाति की गणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य को शामिल करना सही नहीं है।
जनगणना और जाति गणना का काम जनगणना विभाग ही कर सकता है। उसके पास इस काम के लिए संसाधन भी हैं और अनुभव भी। यूनिक आइडेंटी कार्ड विभाग के पास न अनुभव है न संसाधन। आईडेंटी कार्ड बनाने वालों को जाति जनगणना का काम सौंपने का अर्थ होगा, इस पूरी कवायद को बर्बाद कर देना।

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बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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