हाशिया

बीच सफ़हे की लड़ाई

अपना नाम कल वियतनाम, आज कश्मीर

Posted by Reyaz-ul-haque on 8/09/2010 06:44:00 PM

क्रांतिकारी कवि वरवर राव की शायद यह पहली कविता है जो मूलतः हिंदी में लिखी गई है. इसे वरवर ने जंतर-मंतर पर कश्मीर में जारी राजकीय दमन के खिलाफ होनेवाले विरोध प्रदर्शन के दिन लिखा था. वरवर को हिंदी की सीमित जानकारी के कारण हो सकता है कि इस कविता की कुछ लाइनें अटपटी लगें, लेकिन वे वरवर के भाव को पेश तो करती ही हैं.

अपना नाम कल वियतनाम आज कश्मीर

अब तक तो इतना ही समझते थे कि
ईंट का जवाब पत्थर हो सकता है
आज हमारे बच्चे सिखा रहे हैं कि
फौज़ का भी जवाब पत्थर हो सकता है
गोली का जवाब घाटी से
कर्फ्यू का जवाब खुले मैदान में कदम उठाने वाली
महिलाएं दे सकती हैं
दमन का जवाब आजादी की मांग से ही दिया जा सकता है
आपने कहीं देखा है
हमारे देश, हमारे लोग, झील, नदी, पहाड़
घाटी और
सुन्दर जीवन, वन एक तरफ
और साठ साल से कानून और सेना के कब्ज़े में
छीन ली गई सत्ता एक तरफ
अपना नाम अगर कल वियतनाम हो तो आज कश्मीर है
आज भी नक्सलबाड़ी के साथ हमारा मुक्ति का नारा है।

-वरवर राव

जश्न-ए-आजादी/संजय काक

Related Posts by Categories



Widget by Hoctro | Jack Book
  1. 2 टिप्पणियां: Responses to “ अपना नाम कल वियतनाम, आज कश्मीर ”

  2. By माधव on August 9, 2010 at 6:49 PM

    सहमत

  3. By रवि कुमार, रावतभाटा on August 9, 2010 at 8:41 PM

    वरवर राव की कविताएं सीधा संवाद करती हैं...
    आभार...

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


फीड पाएं


रीडर में पढें या ई मेल से पाएं:

अपना ई मेल लिखें :




हाशिये में खोजें