हाशिया

बीच सफ़हे की लड़ाई

माओवाद पर जारी बहसः ईपीडब्ल्यू से साभार

Posted by Reyaz-ul-haque on 6/01/2010 07:29:00 PM


कुछ माह पहले मंछली रिव्यू की वेबसाइट पर बर्नार्ड डिमेलो का एक लंबा आलेख छपा था, जिसे बाद में इकोनॉमिक एंड पोलिटिकल वीकली ने संपादित करके छापा, जिसके डिमेलो उप संपादक भी है. ईपीडब्ल्यू में प्रकाशित होने के बाद इस आलेख पर मॉन्ट्रियाल स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ क्यूबेक में प्राध्यापक परेश चक्रवर्ती ने लंबी टिप्पणी लिखी है, जिसे इस हफ्ते ईपीडब्ल्यू ने प्रकाशित किया है. साथ में डिमेलो का जवाब भी प्रकाशित किया गया है.
हाशिया के पाठकों के लिए पेश है तीनों आलेख (साथ में मंथली रिव्यू की वेबसाइट पर प्रकाशित मूल और असंपादित आलेख भी). इसे यहां भारत में माओवाद पर जारी बहस के सिलसिले में दिया जा रहा है.


मंथली रिव्यू वेबसाइट पर प्रकाशित डिमेलो का मूल आलेख
What is Maoism




ईपीडब्ल्यू में प्रकाशित डिमेलो का आलेख

What is Maoism





चक्रवर्ती की टिप्पणी

On What is Maoism




डिमेलो का जवाब

Did Lenin and Forsake Marx

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  1. 0 टिप्पणियां: Responses to “ माओवाद पर जारी बहसः ईपीडब्ल्यू से साभार ”

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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