हमरी अटरिया पे आओ संवरिया
Posted by Reyaz-ul-haque on 5/31/2010 01:41:00 PMकभी कभी कुछ गीत कितनी पुरानी यादों को छेड़ देते हैं. उस रात जब उमा (अचानक, जिसकी मैं अपेक्षा भी नहीं कर रहा था) ने यह गीत सुनाया तो हमें पटना के वे दिन याद आ गए, जब प्रभात खबर के दफ्तर के सामने अजय जी (जो तब प्रभात खबर के संपादक हुआ करते थे) के साथ फुटपाथ पर बैठ कर देर तक यह गीत गुनगुनाया करते थे. कभी यह गीत जब उन्हें अपने दफ्तर में याद आता तो वे टेबल पर थाप देकर गाते. इस गीत के साथ मैं उसी तरह बड़ा हुआ हूँ जैसे...
नहीं, ज्यादा इंतजार नहीं. बस अब ये गीत सुनिए.
बेगम अख्तर
शोभा गुर्टू
| Posted in »


1 टिप्पणियां: Responses to “ हमरी अटरिया पे आओ संवरिया ”
By pratibha on June 1, 2010 12:29 AM
बहुत ही अच्छा!