हाशिया

बीच सफ़हे की लड़ाई

विद्रोहों के केंद्र में कुछ रातें और कुछ दिनः जन मिर्डल व गौतम नवलखा

Posted by Reyaz-ul-haque on 4/02/2010 03:16:00 AM

बस्तर और माओवादी प्रभाव वाले इलाकों के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन के बारे में एक और रिपोर्ट आई है. स्वीडेन के लेखक जन मिर्डल और मानवाधिकार कार्यकर्ता तथा ईपीडब्ल्यू के सलाहकार संपादक गौतम नवलखा हाल ही में उन इलाकों से लौटे हैं. उन्होंने प्रतिबंधित भाकपा माओवादी के महासचिव गणपति से एक लंबी बातचीत की थी. यह अनेक वेबसाइटों पर प्रकाशित हुई थी. बताते चलें कि जन मिर्डल जानेमाने अर्थशास्त्री गुन्नार मिर्डल के बेटे हैं, जिन्होंने अभी, एकदम अभी उनकी यह ताजा रिपोर्ट अंगरेजी में प्रकाशित हुई है. पेश है इस अंगरेजी रिपोर्ट का लिंक. पढ़िए या डाउनलोड कीजिए.

Related Posts by Categories



Widget by Hoctro | Jack Book
  1. 1 टिप्पणियां: Responses to “ विद्रोहों के केंद्र में कुछ रातें और कुछ दिनः जन मिर्डल व गौतम नवलखा ”

  2. By Rangnath Singh on April 2, 2010 at 3:35 AM

    इसके लिए भी गहरा आभार।

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


फीड पाएं


रीडर में पढें या ई मेल से पाएं:

अपना ई मेल लिखें :




हाशिये में खोजें