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बीच सफ़हे की लड़ाई

सुनिएः छत्तीसगढ़ कहत हे, जियन दे हमनला

Posted by Reyaz-ul-haque on 3/17/2010 06:44:00 PM

यह छत्तीसगढ़ की आवाज है, जो सारे देश की जनता का प्रतिनिधित्व करती है. साम्राज्यवाद के चमकदार स्टूडियो में बैठ कर भनभनानेवाली मक्खियों, आक्रामक, बदतमीज और उज्जड टीवी पत्रकारों और उनके मालिकों का देश नहीं, भूखे और वंचित लोगों का देश. यह गीत राजकीय दमन, लाठी-गोली और सलवा जुडूम को खारिज करता है.

यह आवाज सुनिए. इसे छत्तीसगढ़ की अशिक्षित दलित महिला और नई पांडवानी गायिका बुधन मेश्राम ने लिखा और गाया है. इसे हमने एक मेल से हासिल किया है.



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सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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