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बीच सफ़हे की लड़ाई

आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बनते हुए

Posted by Reyaz-ul-haque on 3/30/2010 08:34:00 PM

उपन्यासकार, कार्यकर्ता, पत्रकार और आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा? 

अरुंधति राय ने इस बातचीत में भारत के केंद्र में स्थित जंगलों में माओवादी क्रांतिकारियों से मिलने और बात करने के लिए किए गए की गई यात्रा के बारे में बताया है. राय यहां लारा को प्रतिरोध और संघर्ष, युद्ध और उपनिवेशवाद के बारे में बता रही हैं. वे बता रही हैं कि आप गोलियों से एक विचारधारा की हत्या नहीं कर सकते और किस तरह हम सभी आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बन गए हैं. इस वीडियो को हमने जीआरआई टीवी से लिया है.





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सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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