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बीच सफ़हे की लड़ाई

अपराध मुक्त बिहार का प्रचार और माफियाओं के मौला

Posted by Reyaz-ul-haque on 12/27/2009 11:43:00 AM

अपराध मुक्त बिहार का दावा कितना खोखला है, यह हम आगे जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता और इन दिनों खुद को नीतीश कुमार का ढोल और भोंपू कहने वाले शिवानंद तिवारी तथा श्याम रजक की जुबानी सुनेंगे. इससे पहले नीतीश की सोहबत में पलने वाले दुर्दांत अपराधियों की सूची पर नजर डाल लें. नीतीश चाहे सांसद रहे हों, रेल मंत्री बने हों या मुख्यमंत्री, इन बाहुबलियों को मदद पहुंचाने में उन्होंने कभी कोताही नहीं की.  

दिलीप सिंह
मोकामा का प्रमुख बाहुबली. नेशनल सिक्यूरिटी एक्ट का आरोपी. नीतीश ने 1989 में बाढ़ से चुनाव जीतने के लिए इसकी मदद ली और जीत भी गये. 1990 में बतौर ईनाम दिलीप को मोकामा विधान सभा सीट से जनता दल का टिकद देकर विधायक बनवाया. लालू राज में मंत्री.

सूरजभान सिंह
मोकामा का एक और बाहुबली. अनेक व्यवसायियों समेत कई राजनीतिक हत्याओं का आरोपी. छोटे-मोटे अपराध करने वाला तथा जुआ खेलने का लती सूरजभान दिलीप सिंह का शागिर्द था. दिलीप सिंह के राजनीति की दुनिया में पहुंच जाने के बाद सूरजभान की हैसियत और खूंखारपन बढ़ता गया. उसने कई चुनावों में नीतीश की मदद की. बाद में मोकामा से निर्दलीय विधायक फिर बलिया से निर्दलीय सांसद बना. इन दिनों रामविलास पासवान की पार्टी लोजपा में है लेकिन नीतीश-ललन की जोड़ी का पूरा प्रश्रय आज भी इसे प्राप्त है. सरकारी वकील की हत्या के मामले में नीतीश के इशारे पर बचाया गया. गत लोकसभा चुनाव में लोजपा में होते हुए भी मुंगेर में ललन सिंह को जितवाने के लिए हरवे-हथियार के साथ तैनात रहा.

वृजबिहारी प्रसाद
पूर्वी चंपारण के बाहुबली विधायक देवेंद्र दुबे के कत्ल का आरोपी. कामख्या सिंह, विनोद सिंह, ओंकार सिंह, टाइगर मिश्र सरीखे खूंखार अपराधियों की टीम का सरगना. नीतीश और उनके खास सिपहसलार रामाश्रय सिंह बृज बिहारी को राजनीति में लाये. नीतीश कुमार के लिए उसने 1991 के लोकसभा चुनाव में बाढ़ में जमकर उत्पात मचाया. बाद में रेलवे ठेकों के चक्कर में मारा गया. जब तक जीवित रहा नीतीश कुमार का वरदहस्त उसे प्राप्त रहा.     

दुलारचंद यादव
दो दर्जन से ज्यादा हत्याओं का आरोपी. पटना से सटे फतुहा थाना पर हमला बोल कर हथियार लूटने का भी आरोप. नीतीश का अनन्य सहयोगी. लोकसभा चुनाव के दौरान बाढ़ के निकट एक गांव में हुई सीताराम सिंह की हत्या में नीतीश कुमार के साथ धारा 302 और 307 का सहअभियुक्त.

संजय सिंह
सीवान का नामी गैंगेस्टर. नीतीश ने 1995 के चुनाव में जीरादेई से समता पार्टी का उम्मीदवार बनाया. कई-कई बड़े-बड़े ठेके दिलवाये. 1996 के लोकसभा चुनाव में संजय के गुर्गों ने बाढ़ में नीतीश की भरपूर मदद की. अपराध की दुनिया में राजनीतिक के नियम नहीं चलते. उस चुनाव में दिलीप सिंह ने भी नीतीश की काफी मदद की थी. जबकि दिलीप सिंह उन दिनों लालू प्रसाद के साथ था.

अनंत सिंह
बिहार का सबसे दुर्दांत अपराधी. दिलीप सिंह का छोटा भाई. जदयू का मोकमा से विधायक. बाहुबली सूरजभान (सांसद, लोजपा) से अब अदवात. छोटे सरकार के नाम से जाने जाने वाले अनंत सिंह के रोंगटे खड़ा कर देने वाले अपराधिक कारनामों से बिहार का बषा-बषा परिचित है. राजनीति में इसकी हैसियत का अंदाजा एक वाकये से लगाया जा सकता है. पिछले दिनों लोकसभा चुनाव के दौरान मुंगेर में ललन सिंह को मदद करने के एवज में सूरजभान सिंह को जदयू में लाने का फैसला किया गया था. अनंत को जब इसकी सूचना मिली तो उसने जदयू के प्रदेश अध्यक्ष ललन सिंह को ऐसा घुड़का कि दोबारा इस बारे में बात करने की हिम्मत न नीतीश कुमार को हुई, न ही ललन सिंह को. बिहार के सबसे अधिक बिकने वाले हिंदी अखबार में इसके लोग बतौर पत्रकार भी बहाल होते रहे हैं.

मुन्ना शुक्ला
गैंगेस्टर मुन्ना शुक्ला नीतीश कुमार के समर्थन से ही लालगंज से निर्दलीय चुनाव जीत सका था. अगले चुनाव में उसे जदयू का टिकट दिया गया. रेलवे के ठेकों की बदौलत आज अरबों का मालिक.

सतीश, बब्लू, सुनील
वास्तव में नीतीश कुमार की सोहबत में पलने वाले अपराधियों की फेहरिश्त काफी लंबी रही है. वर्ष 2000 के बिहार विधान सभा चुनाव में तो उन्होंने प्रदेश के छंटे हुए अपराधियों को समता पार्टी का प्रत्याशी बनाया था. इनमें सतीश पांडेय, बब्लू देव, सुनील पांडेय आदि तो मोस्ट वांटेड थे. नीतीश अपराधियों का साथ लेते ही नहीं बल्कि उनके मारे जाने के बाद उनके परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेवारी भी उठाते रहे हैं. पूर्णिया जिला के तत्कालीन समता पार्टी के अध्यक्ष बाहुबली बूटन सिंह की पत्नी लेसी सिंह को उन्होंने राज्य महिला आयोग के संवैधानिक पद से नवाजा है. बाहुबली प्रदीप महतो की पत्नी अश्ववमेध देवी को पहले कल्याणपुर से विधायक बनाया फिर गत लोकसभा चुनाव में उजियारपुर से टिकट देकर लोकसभा भेज दिया.

पुस्तिका सुशासन का असली चेहरा से साभार 

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  1. 1 टिप्पणियां: Responses to “ अपराध मुक्त बिहार का प्रचार और माफियाओं के मौला ”

  2. By काजल कुमार Kajal Kumar on December 27, 2009 at 1:07 PM

    अब अच्छे आदमी कहां से लाएं

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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