हाशिया

बीच सफ़हे की लड़ाई

भूख से मरनेवालों के लिए एक प्रवक्ता, तसवीर सहित

Posted by Reyaz-ul-haque on 12/16/2009 01:00:00 PM

17 जून 2009 को खंडवा (मध्य प्रदेश) के सलेधना गाँव की 2 माह कि बच्ची रीना किशोर की भूख से मौत हो गयी. इसी साल अक्टूबर के शुरूआती दिनों में अमेठी में एक रिक्शाचालक की मौत भूख से हो गयी. ये नहीं जानते थे कि इनकी भूख के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त की गयी हैं, जो भूखों को भुखमरी से निजात दिलायेगीं. ये हैं क्रिस्टीना अगुलेरिया. ये गायिका हैं और इन्हें वल्ड हंगर रिलीफ ओर्गेनैजेशन की प्रवक्ता बनाया गया है. अब देश और दुनिया के भुखमरी के शिकार लोगों के लिए यह राहत की बात होनी चाहिए. (समस्या को मूल मुद्दे से भटका कर ले जाने और इस तरह के स्टार वार में इसे उलझा देने के षड्यंत्र को समझना होगा. भूखों को किसी प्रवक्ता की ज़रुरत नहीं है, बल्कि अनाज पर उसे उपजाने वाले के अधिकार देने, सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मज़बूत किये जाने, कृषि में सार्वजनिक खर्च बढ़ने, संस्थानिक कर्जे मुहैया करने, सूदखोरी बंद करने, देशी बीज और कीटनाशक उपलब्ध करने और खेती को निगमों से मुक्त करने, सबको रोजगार देने और बिना किसी देरी के व्यापक भूमि सुधर लागू करने की ज़रुरत है. इसके बिना हम कुछ नहीं कर पाएंगे.) 


 

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बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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