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बीच सफ़हे की लड़ाई

वर्धा में दलित छात्र को नहीं किया जा रहा दाखिला

Posted by Reyaz-ul-haque on 12/09/2009 03:38:00 PM

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में एक दलित छात्र के उत्पीडन और पीएचडी में उसका प्रवेश न लेने के ख़‍िलाफ़ छात्रों ने मंगलवार से आमरण अनशन शुरू कर दिया। छात्र बुधवार को आयोजित होनेवाले दीक्षांत समारोह का भी बहिष्कार करेंगे। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अंबेडकर स्टूडेंट्स फोरम का कहना है की अनुवाद विद्यापीठ में एमफिल के टॉपर रहे राहुल कांबले का जानबूझकर पीएचडी में दाखिला नहीं लिया जा रहा। राहुल का चयन सामान्य वर्ग में प्रतीक्षा सूची नंबर एक पर हुआ। एक चयनित छात्रा द्वारा प्रवेश न लेने से एक सीट खाली है, जिस पर नियम के अनुसार राहुल का नामांकन होना चाहिए। लेकिन केवल दलित छात्र होने कारण राहुल का नामांकन सामान्य वर्ग में नहीं किया जा रहा है, जबकि उसका चयन सामान्य वर्ग में हुआ है।

छात्र राहुल कांबले का आरोप है की विद्यापीठ के डीन प्रो आत्मप्रकाश श्रीवास्तव पिछले दो महीने से उसका मानसिक और भावनात्मक शोषण कर रहे हैं। विश्वविद्यालय के कुलपति ने भी इस मामले में कभी कोई गंभीरता नहीं दिखायी और राहुल को ही बार-बार प्रो श्रीवास्तव से माफी मांगने पर मजबूर किया और अंत में उसको एडमिशन देने से मना कर दिया। प्रो श्रीवास्तव ने कई बार राहुल पर जातिगत पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर कमेंट किया। यही नहीं, उसके प्रोफेसर पिता पर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं।

अंत में बार-बार ज्ञापन और अनुरोध-पत्र देने के बावजूद प्रशासन द्वारा इस मामले पर कोई रुचि न दिखाने से सबक लेते हुए विश्वविद्यालय के दलित छात्र-छात्राओं ने दीक्षांत समारोह का पूरी तरह बहिष्कार करने का निर्णय लिया हंै। इस मामले में छात्रों के हस्ताक्षरों की दो प्रतियां कुलपति को सौपी जा चुकी हैं। उसमें विश्वविद्यालय के गैर-दलित छात्रों ने भी अपना समर्थन जताते हुए हस्ताक्षर किए हैं। फोरम का स्पष्ट मानना है कि प्रो. श्रीवास्तव ने राहुल का जातिगत उत्पीड़न किया है। अतः उनके ख़‍िलाफ़ उचित कारवाई होनी चाहिए और राहुल कांबले का तत्काल पीएचडी में नामांकन होना चाहिए। फोरम ने इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय के उपेक्षित रवैये की भी निंदा की है। फोरम की तरफ से दलित छात्र इस मामले को लेकर मंगलवार को दोहपर बाद से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठ गये हैं।

छात्रों द्वारा कुलपति विभूति नारायण राय को दिया गया ज्ञापन

प्रति,
कुलपति,
म गां अं हिं विवि, वर्धा

विनम्र आग्रह है कि राहुल कांबले के मामले को लेकर फोरम माननीय महोदय से कई बार अनुरोध कर चुका है, लेकिन प्रशासन की तरफ से किसी भी तरह की सकारात्मक प्रतिक्रीया न आने के कारण हम आज दिनांक 08. 12. 2009, मंगलवार को विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय के निकट आमरण अनशन पर बैठने जा रहे है। हमारी दो मुख्य मांगें हैं -

    1. राहुल कांबले का तत्काल पीएचडी में नामांकन दिया जाए।
    2. राहुल कांबले को मानसिक एवं भावनात्मक उत्पीड़न देनेवाले प्रो आत्मप्रकाश श्रीवास्तव के ख़‍िलाफ़ कारवाई की जाए।


इन दोनों मांगों के साथ हम कोई समझौता नहीं करने वाले हैं और न ही प्रशासन के दलित विरोधी रवैये के आगे झुकने वाले हैं। न्याय पाने तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा। इसके साथ ही हम दिनांक 09 दिसंबर 2009 को आयोजित होनेवाले दीक्षांत समारोह के बहिष्कार की भी घोषणा करते है।

केंद्रीय समिति,
अंबेडकर स्टूडेंट्स फोरम

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सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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