हाशिया

बीच सफ़हे की लड़ाई

हम ज़मीन हैं : अष्टभुजा शुक्ल की कविता

Posted by Reyaz-ul-haque on 12/02/2009 05:00:00 AM

अष्टभुजा शुक्ल 


हमारे ऊपर

है एक मोटरसाइकिल

उसके ऊपर एक मारूति कार

उसके ऊपर वायुयान

और हम पदाति हैं



हमारे ऊपर

है एक चौकीदार

उसके ऊपर सिपाही

उसके ऊपर दरोगा

उसके ऊपर कप्तान

उसके ऊपर गृहमंत्री

और हम अपराधी हैं



हमारे ऊपर

है ग्राम प्रधान

उसके ऊपर विधायक

उसके ऊपर मंत्री

और हम नागरिक हैं



हमारे ऊपर

हैं बीज

उसके ऊपर पौधे

उसके ऊपर बालियाँ

उसके ऊपर भक्षक

और हम ज़मीन हैं

Related Posts by Categories



Widget by Hoctro | Jack Book
  1. 1 टिप्पणियां: Responses to “ हम ज़मीन हैं : अष्टभुजा शुक्ल की कविता ”

  2. By शरद कोकास on December 2, 2009 at 8:41 AM

    बहुत बढिया कविता है अष्टभुजा जी को बधाई ।-शरद कोकास ,दुर्ग

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


फीड पाएं


रीडर में पढें या ई मेल से पाएं:

अपना ई मेल लिखें :




हाशिये में खोजें