शशि को मैं कैसे याद करूं, कैसे?
Posted by Reyaz-ul-haque on 11/05/2009 02:10:00 PMयह मेरे लिए एक हिला देनेवाली ख़बर है। शशि भाई (शशि भूषण) नहीं रहे। डेंगू (!!!) ने उनकी जान ले ली। अभी कुछ ही दिन पहले उनका फ़ोन आया था, और हम जल्दी ही मिलनेवाले थे, बहुत दिनों के बाद। पिछली मुलाकात उनसे जब हुई थी, मैं प्रभात ख़बर में था, वे किसी रिश्तेदार को छोड़ने राजेंद्रनगर टर्मिनल ( पटना) आए थे। मुझसे मिलने चले आए। फुटपाथ पर बैठ कर हमने ढेर सारी बातें की थीं, चाय पीते हुए।
कुछ समय पहले वे दिल्ली आ गये, एनएसडी में चुने जाने के बाद। लगभग दो हफ्ते पहले नोएडा के किसी अस्पताल में उनका जांडिस का इलाज चल रहा था। वे ठीक हो रहे थे, उनका कहना था। और अब पता चला की वे नहीं रहे। उन्हें डेंगू था।
यकीन नहीं आता ऐसे कोई चला जाता है, कैसे, बेआवाज़, खामोशी से।
यह मौका ऐसा है, जब बहुत कुछ लिखा नहीं जा रहा है। शशि अपने साथ हमारी आवाज़ भी ले गए हैं। अभी हमें उन्हें याद करने दीजिये, अकेले में। बस एक सवाल, एक ऐसे देश की राजधानी में, जहाँ औपनिवेशिक यादों को जिलाए रखने के लिए 15 दिनों के खेलों के लिए अरबों रुपये फूंके जा रहे हों, और जो महाशक्ति बनने की कगार पर ही हो (बस अपने 80 फीसदी आबादी पर अपनी समूची सैन्य ताकत झोंक देने भर की देर है), एक चर्चित नाट्य विद्यालय के छात्र के डेंगू से मर जाने को हम कैसे याद रखेंगे?
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2 टिप्पणियां: Responses to “ शशि को मैं कैसे याद करूं, कैसे? ”
By नीरज गोस्वामी on November 5, 2009 6:50 PM
दिल हिला देने वाला सवाल किया है आपने...कितनी सच्ची बात...उफ़..
नीरज
By महफूज़ अली on November 5, 2009 7:37 PM
is dukh ki ghadi mein main aapke saath hoon.........