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बीच सफ़हे की लड़ाई

चांद पर पहुंचने का झूठ और चालीस साल पहले का सच

Written by Reyaz-ul-haque on 7/20/2009 03:00:00 PM

आज जब दुनिया मनुष्य के चांद पर पहुँचने के चार दशक पूरे होने के उलास में डूब-उतरा रही है, हमें एक बार उन वास्तविक तथ्यों और सवालों पर नज़र डालने की ज़रूरत है, जो इस अभियान से जुड़े हुए हैं और उल्लास में डूब जाने से पहले अपने को यह यकीन दिलाने की ज़रूरत है की हम मानव इतिहास के एक सबसे बड़े झूठ से रू-ब-रू होने जा रहे हैं।

ये कुछ सवाल हैं, और तथ्य हैं जो यह साफ़ तौर पर साबित करते हैं कि मनुष्य आज तक चांद पर नहीं पहुँचा है, और हमें झूठ बताया जाता रहा है।



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  1. 6 टिप्पणियां: Responses to “ चांद पर पहुंचने का झूठ और चालीस साल पहले का सच ”

  2. By Manisha on July 20, 2009 4:01 PM

    इस बारे में और यह भी पढ़िये।

    मनीषा

  3. By महेन्द्र मिश्र on July 20, 2009 6:33 PM

    सटीक अभिव्यक्ति . इस विषय में मैंने काफी पहले एक आलेख पढ़ा था जिसमे चाँद पर न पहुँचने का दावा किया गया था. बढ़िया आलेख.

  4. By निशांत मिश्र - Nishant Mishra on July 20, 2009 10:54 PM

    सही कह रहे हैं आप, मैं तो कहूँगा की आदमी अभी तक अन्तरिक्ष में भी नहीं गया है. अन्तरिक्ष में उपग्रहों को भेजने की बात भी गलत है. सब गलत है. सब झूठ है.

  5. By Ashish Shrivastava on July 21, 2009 7:35 AM

    रीयाज, भाई
    इंसान चांद पर नही गया है एक बकवास है।
    इस बकवास की शुरूवात फाक्स टीवी के एक कार्यक्रम से हुयी थी। यह एक कान्सपीरेसी थ्योरी है जो बकवास और अवैज्ञानिक तथ्यो पर् आधारित है।
    मानव शक्ति पर भरोसा किजिये, मनुष्य चांद पर विजय पा चुका है।
    ये साईट देखिये (फिल फैट का नासा से कोई लेना देना नही है ना उन्हे अमरीकी सरकार से कोई पैसा मिलता है। ये महाशय फिल्मो मे भी अवैज्ञानिक तत्वो की बखिया उधेड़ते है।)
    http://www.badastronomy.com/bad/tv/foxapollo.html
    ऊपर वाले लेख पर भरोसा ना हो तो ये देखिये (ये मिथबस्टर है जो काफी प्रसिद्ध और वैज्ञानिक तरिको से जांच पड़ताल करता है)
    http://www.youtube.com/watch?v=RMINSD7MmT4&feature=fvw
    http://www.youtube.com/watch?v=MtWMz51eL0Y&feature=related

    यह पूरा विडीयो डिसकवरी चैनल पर मिल जायेगा।
    वैसे भी यदि आप भौतिकि जानते है या फोटोग्राफी के बारे मे जानते है तो आप खुद इस कान्सपिरेसी थोरी के पक्षधरो को झुठला सकते है।
    इस थोरी के पक्षधरो(चंद्रमा पर मानव अवतरण को झुठलाने वालो) को मेरा सबसे बड़ा सवाल
    अमरीका के चण्द्रमा पर पहुचने से पहले सोवियत रूस अंतरिक्ष के हर प्रयोग मे आगे था, स्पेश मे पहला उपग्रह से लेकर् पहले मानव तक।
    अमरीका यदि झुठी कहानी बनाकर कहता है कि उसने चन्द्रमा पर मानव भेज दिया है तब सोवियत संघ खामोश क्यों रहा ? सोवियत संघ पिछड़ जरूर गया था लेकिन वह इतना पिछे भी नही था कि वह अमरीका के यानो पर नजर् नही रक सके !

  6. By Ashish Shrivastava on July 21, 2009 7:40 AM

    थोड़ा मेरे बारे मे भी
    मै भौतिकि और खगोल विज्ञान पर नजर रखता हूं, कुछ जानता हूं, काफी कुछ नही जानता। जानने का प्रयास जारी है।
    मेरे कुछ विज्ञान पर चिठ्ठे यहां पर है

    http://antariksh.wordpress.com/
    http://vigyan.wordpress.com/

  7. By Reyaz-ul-haque on July 22, 2009 9:22 PM

    बकवास है? आशीष भाई आप अपना जो परिचय दे रहे हैं, उससे तो नहीं लगता की आप इसे इतनी आसानी से बकवास कह देंगे. मानव की शक्तियों पर ही भरोसा है, इसलिए हम ये कह रहे हैं यह झूठ है. कान्स्पिरेसी थ्योरी के सवालों के जवाब जो नासा ने दिए है वे भी देखे हैं हमने. किसी को झुठलाने या सच साबित करना हमारा काम नहीं है. हम तथ्यों के आधार पर सच तक पहुँचने की कोशिश में हैं और हमें अब तब कान्स्पिरेसी थ्योरी से अधिक कायल कर देने वाले तर्क किसी के नहीं लगे. और सोवियत संघ के खामोश रहने से क्या यह साबित हो जाता है कि अमेरिका सही था? यह कैसी दलील है?
    रही बात की किसे कहाँ से पैसा नहीं मिलता है कि मिलता है, इसका फैसला इतनी आसानी से कर लेना भी ठीक नहीं है.
    हम उम्मीद करते हैं कि मानव सचमुच चाँद पर जल्दी ही पहुंचेगा...और सचमुच पहुंचेगा, किसी झूठ के ज़रिये नहीं. और न ही किसी ईश्वर कि मदद से.

बीच सफ़हे की लड़ाई

गरीब वह है, जो हमेशा से संघर्ष करता आ रहा है. जिन्हें आतंकवादी कहा जा रहा है. संघर्ष के अंत में ऐसी स्थिति बन गई कि किसी को हथियार उठाना पड़ा. लेकिन हमने पूरी स्थिति को नजरअंदाज करते हुए इस स्थिति को उलझा दिया और सीधे आतंकवाद का मुद्दा सामने खड़ा कर दिया. ये जो पूरी प्रक्रिया है, उन्हें हाशिये पर डाल देने की, उसे भूल गये और सीधा आतंकवाद, ‘वो बनाम हम ’ की प्रक्रिया को सामने खड़ा कर दिया गया. ये जो पूरी प्रक्रिया है, उसे हमें समझना होगा. इस देश में जो आंदोलन थे, जो अहिंसक आंदोलन थे, उनकी क्या हालत हमने बना कर रखी है ? हमने ऐसे आंदोलन को मजाक बना कर रख दिया है. इसीलिए तो लोगों ने हथियार उठाया है न?

अरुंधति राय से आलोक प्रकाश पुतुल की बातचीत.

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कॉरपोरेट जगत के हित में देश की आम जनता के संहार की योजना रोकें
हम महसूस करते हैं कि यह भारतीय लोकतंत्र के लिए एक विध्वंसक कदम होगा, यदि सरकार ने अपने लोगों को, बजाय उनके शिकायतों को निबटाने के उनका सैन्य रूप से दमन करने की कोशिश की. ऐसे किसी अभियान की अल्पकालिक सफलता तक पर संदेह है, लेकिन आम जनता की भयानक दुर्गति में कोई संदेह नहीं है, जैसा कि दुनिया में अनगिनत विद्रोह आंदोलनों के मामलों में देखा गया है. हमारा भारत सरकार से कहना है कि वह तत्काल सशस्त्र बलों को वापस बुलाये और ऐसे किसी भी सैन्य हमले की योजनाओं को रोके, जो गृहयुद्ध में बदल जा सकते हैं और जो भारतीय आबादी के निर्धनतम और सर्वाधिक कमजोर हिस्से को व्यापक तौर पर क्रूर विपदा में धकेल देगा तथा उनके संसाधनों की कॉरपोरेशनों द्वारा लूट का रास्ता साफ कर देगा. इसलिए सभी जनवादी लोगों से हम आह्वान करते हैं कि वे हमारे साथ जुड़ें और इस अपील में शामिल हों.
-अरुंधति रॉय, नोम चोम्स्की, आनंद पटवर्धन, मीरा नायर, सुमित सरकार, डीएन झा, सुभाष गाताडे, प्रशांत भूषण, गौतम नवलखा, हावर्ड जिन व अन्य

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