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बीच सफ़हे की लड़ाई

कोई स्थायी दुश्मन नहीं : न भारत , न पाक

Posted by Reyaz-ul-haque on 7/23/2008 05:17:00 PM

वाशिंगटन में शांति के बीज के कार्यक्रम
कुमार अनिल

'अमेरिकी विदेश नीति की सबसे केंद्रित बात यह है कि दुनिया में वह किसी को स्थायी दुश्मन नहीं मानता.' पिछले दिनों भारत के मुंबई पाकिस्तान के लाहौर के 32 किशोरों ने अमेरिका का दौरा किया. वे वहां तीन हफ्तों तक रुके. प्रवास के अंतिम दिन वाशिंगटन में 'शांति के बीज' कार्यक्रम में इन किशोरों के साथ अमेरिकी विदेश विभाग के बडे अधिकारियों ने भाग लिया. उन्होंने भारत-पाक के किशोरों से कहा कि उन्हें अमेरिकी विदेश नीति के इस मूल मंत्र से सीखना चाहिए अपने देश में जा कर सहिष्णुता समझदारी बढाने का काम करना चाहिए, ताकि दोनों देशों के बीच दूरगामी शांति कायम हो सके.
अमेरिकी विदेश विभाग में उपसचिव नेग्रोपोंट ने किशोरों से कहा कि 'आपका धार्मिक सांस्कृतिक सहिष्णुता, सहअस्तित्व और संवाद दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा. उन्होंने कहा कि कई बार विकास की गति धीमी होती है, इससे झटका लगता है. जरूरी यह है कि हम इस बात की कल्पना कर सकें कि आज के हमारे दुश्मन कल दोस्त हो सकते हैं. उन्होंने कहा,' हम अपने समय की कुछ बडी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जिनमें ऊर्जा सुरक्षा परमाणु अप्रसार शामिल हैं.' उन्होंने कहा कि पाकिस्तान हमारा रणतीतिक पार्टनर है. हम उसके साथ घनिष्ठ रूप से काम कर रहे हैं. हम आर्थिक विकास, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा आतंकवाद से निबटने के लिए काम कर रहे हैं. उन्होंने किशोरों से जोर दे कर कहा कि वे सहिष्णुता समझदारी विकसित करने के लिए अपने देश में काम करें. दशकों तक युद्ध तनाव झेल चुके देशों में ऐसा करना ज्यादा जरूरी है.
इसके बाद गोष्ठी में किशोरों अखबार में छपने के बाद पाठकों के जो विचार आये, वे कम गंभीर नहीं हैं. उसी गोष्ठी में शामिल एक भारतीय किशोर ने टेक्स्ट बुक मीडिया को भ्रम फैलाने के लिए दोषी ठहराया. दोनों पर्वाग्रह से ग्रसित हैं.
दीपक बोस ने कहा कि 'अमेरिका रूस का स्थायी दुश्मन है. मुसलिम देश जैसे पाकिस्तान बांग्लादेश भारत के स्थायी दुश्मन हैं.चीन जापान का स्थायी दुश्मन है. यूएसए, यूके आदि स्थायी दोस्त हैं , क्योंकि वे एक नस्ल के हैं.' ये किसिंगर के शब्द हैं. एक अन्य ने कहा कि क्यूबा यूएस का स्थायी दुश्मन है, जबकि वह आतंकवाद में शामिल नहीं है.

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  1. 2 टिप्पणियां: Responses to “ कोई स्थायी दुश्मन नहीं : न भारत , न पाक ”

  2. By SUNIL DOGRA जालि‍म on July 23, 2008 at 5:36 PM

    हम भी यही कामना करते हैं, लेकिन कई बार अस्थाई दुश्मनी भी बहुत भरी पड़ती है.. पिसना तो इंसानों को ही है फिर चाहे सरहद के किसी भी तरफ के लोग पिसें..

  3. By cartoonist ABHISHEK on July 23, 2008 at 5:37 PM

    सही लिखा आपने...

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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