हाशिया

बीच सफ़हे की लड़ाई

सभी ब्लॉगर साथियों से एक अपील

Posted by Reyaz-ul-haque on 5/07/2008 10:41:00 PM

साथियों
प्रशांत राही पर की गयी पोस्ट में एक टिप्पणी आयी है कि उनकी रिहाई के लिए हम सभी ब्लॉगर अपने अपने ब्लागों पर लिखें और सामूहिक मेल करें।


swapandarshi said...
This is very unfortunate and undemocratic.
Can you write another article about mr Prashant Raahi, to introduce his work and him more. May be Aflatoon ji can write if he has been a long time friend of mr Raahi.

and many bloggers can have that appeal on their pages
as well a collective email appeal can be initiated...

मुझे भी लगता है कि ऐसा किया जाए। आप सबके सामने यह प्रस्ताव रख रहा हूँ।
इसके अलावा अफलातून जी से मेरा भी निवेदन है कि प्रशांत राही के बारे में एक पोस्ट लिखें।

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  1. 5 टिप्पणियां: Responses to “ सभी ब्लॉगर साथियों से एक अपील ”

  2. By दिनेशराय द्विवेदी on May 7, 2008 at 11:04 PM

    प्रशांत राही के बारे में जरुर जानना चाहूँगा, और अपील करना भी।

  3. By चन्द्रिका on May 8, 2008 at 1:37 AM

    हम हशिया के इस पहल की कद्र करते है .....कि उसने प्रशन्त राही के लिये आवाज उठायी। हाल ही मे प्रशान्त राही को और प्रफ़ुल्ल झा को लेकर दिल्ली में एक कमेटी बनायी गयी है और लोग लड रहे हैं। पर एक बार हमें सोचना होगा कि सरकार क्या कर रही है और कब तक करती रहेगी। बिनायक सेन की गिरफ़्तारी के बाद, उनका और ऎसे कई मामलॊं का हवाला देकर बिहार में महाराष्ट में छत्तीस्गढ मे कई सामाजिक कार्यकर्ताओं को पकडा गया है .दूसरी बात ये भी है कि अभी हाल में पी.यू.सी.एल. के एक सदस्य और फ़िल्म मेकर अजय टी.जी को भी भिलाई से गिरफ्तार किया गया है . दोस्तों कम-अज-कम हम सम जो भी ब्लाग की दुनिया से जुडे है ....जो पत्रकारिता की दुनिया से जुडे है उन्हे अगर अपनी आवाज को कैद नहीं बनाना है तो आवाज उठानी ही होगी।

  4. By Udan Tashtari on May 8, 2008 at 8:40 AM

    जरा और विस्तार से लिखें इनके बारे में:

    -----------------------------


    आप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं इस निवेदन के साथ कि नये लोगों को जोड़ें, पुरानों को प्रोत्साहित करें-यही हिन्दी चिट्ठाजगत की सच्ची सेवा है.

    एक नया हिन्दी चिट्ठा भी शुरु करवायें तो मुझ पर और अनेकों पर आपका अहसान कहलायेगा.

    इन्तजार करता हूँ कि कौन सा शुरु करवाया. उसे एग्रीगेटर पर लाना मेरी जिम्मेदारी मान लें यदि वह सामाजिक एवं एग्रीगेटर के मापदण्ड पर खरा उतरता है.

    यह वाली टिप्पणी भी एक अभियान है. इस टिप्पणी को आगे बढ़ा कर इस अभियान में शामिल हों. शुभकामनाऐं.

  5. By lovely kumari on May 8, 2008 at 6:27 PM

    aap vistar se btayen hum jarur apil krenge

  6. By Reyaz-ul-haque on May 8, 2008 at 10:09 PM

    @ lovely kumari

    Prashant rahi aur unaki giraftari ke bare men aur jaanane ke liye in posts ko padhen.

    http://hashiya.blogspot.com/2008/05/blog-post_07.html

    http://hashiya.blogspot.com/2008/05/blog-post_06.html

    http://hashiya.blogspot.com/2008/05/blog-post_7809.html

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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