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बीच सफ़हे की लड़ाई

ऐसे हुई लादेन से मुलाकात : पढिये रविवार पर

Posted by Reyaz-ul-haque on 5/05/2008 04:52:00 PM

दुनिया भर में आतंक का पर्याय बन चुके ओसामा बिन लादेन की तलाश में क़ाबुल से लेकर जलालाबाद और तोरा-बोरा की पहाड़ियों से वजीरिस्तान तक पिछले कई सालों से अमरीकी फौजें अपने जूते चटकाती फिर रही हैं. पाकिस्तान के तेज़ तर्रार पत्रकार और जिओ टीवी के संपादक हामिद मीर 9/11 के बाद ओसामा बिन लादेन का साक्षात्कार लेने वाले दुनिया के अकेले पत्रकार हैं. हामिद मीर शुरुवाती अंकों से ही रविवार के लिए लिख रहे हैं. भारत-पाकिस्तान में पहली बार रविवार में लादेन से उनकी मुलाकात का यह ब्यौरा प्रकाशित हो रहा है।

इसके अलावा है रविवार के इस नए अंक में और भी बहुत कुछ। तओ बस नीचे की इमेज पर क्लिक करें.







रविवार मूल तौर पर दुनिया भर में फैले ऐसे लोगों का साझा मंच है, जिनकी आस्था पत्रकारिता में है. रविवार को बेहतर बनाने की कोशिश में हमें दुनिया के अलग-अलग देशों के लेखक मित्रों का सहयोग मिल रहा है.
पत्रकारिता जिस दौर से गुजर रही है, उस में हम रविवार के सहारे किसी क्रांति या बदलाव का दावा नहीं कर रहे हैं। यह हमारे ही द्वारा निर्मित समय में एक विनम्र हस्तक्षेप की कोशिश भर है, जिसमें आप भी जुड़ सकते हैं।

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सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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