हाशिया

बीच सफ़हे की लड़ाई

सट्टेबाजी के भयानक बवंडर पर बैठी अर्थव्यवस्था

Posted by Reyaz-ul-haque on 4/21/2008 07:28:00 PM

दुनिया के आर्थिक बाज़ारों में हलचल मची हुई हैंशेयर बाज़ार के चढाने और उतरने की खबरें आजकल काफी चर्चा में हैंइसके साथ ही अमेरिकी अर्थव्यवस्था के संकट की चर्चा भे काफी जोरों पर हैंआख़िर यह संकट क्या हैं? इसकी वजह क्या हैं? और आम जनता और गरीब देशो के लिए इसका क्या मतलब हैं? पूरा सन्दर्भ तीन किश्तों में बता रही हैं सुष्मिता।

शेयर बाजार में नित नये भूचाल की खबरें सुर्खियों में हैं। हरेक आनेवाला सोमवार शेयर बाजार वेफ इतिहास में और अध्कि काले सोमवार की श्रेणियों में खड़ा होता जा रहा है। शेयर बाजार के हरेक भूचाल के बाद कहा जाता है कि यह मूल रूप से अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आये संकट के कारण है। आखिर यह संकट क्या है? इसकी मूल वजह क्या है? खैर जो भी हो यह बात अब स्पष्ट रूप से स्वीकार की जा रही है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था मंदी का शिकार हो चुकी है। जॉर्ज बुश अपनी जनता को सरकार द्वारा पायी रियायतों को उपभोक्ता बाजार में खर्च करने की सलाह दे रहे हैं।
पिछले 17 मार्च को वॉल स्ट्रीट निवेशक बैंक ÷बियर स्टर्नस' के ढहने के कगार पर पहुँचने एवं पिफर इसके 'जेपी मॉर्गन चेज' द्वारा अध्ग्रिहण के बाद एशिया के शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गयी। जापान का निक्की सूचकांक ३.7 प्रतिशत तक गिर गया, जो लगातार तीसरे दिन की गिरावट थी। शंघाई शेयर बाजार ३.6 प्रतिशत एवं मुंबई शेयर बाजार 6.03 प्रतिशत तक गिर गया।

इस गिरावट का मतलब समभफना चाहते हों तब दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली म्यूंज बाक की सुनिए, ÷हमलोग संकट के महज शुरुआती अवस्था में हैं। विश्व की अर्थव्यवस्था पर इसके संपूर्ण प्रभाव के बारे में भविष्यवाणी करना असंभव है। मैं सोचता हूँ कि यह एक विश्वव्यापी आर्थिक संकट की शुरुआत हो सकती है।' तीन बड़ी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं - चीन, जापान एवं भारत - में शेयर के मूल्य में इस साल व्रफमशः 30, 20 एवं 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी। इस साल अमेरिकी बाजार में यह गिरावट लगभग 13 प्रतिशत थी। दुनिया के शेयर बाजारों में इन गिरावटों के पीछे मूल वजह अमेरिकी वित्तीय बाजार में अगस्त, 2007 से जारी एक भारी संकट को बताया जा रहा है, हम जिसे सब प्राइम संकट के नाम से भी जानते हैं।


सब प्राइम संकट क्या है?

अमेरिका में विभिन्न प्रकार के ट्टणों की अलग-अलग श्रेणियों में ग्रेडिंग की जाती है। सबसे कम जोखिमवाले ट्टणों को प्राइम ट्टण कहा जाता है। इसके डूबने का खतरा कम होता है। इससे अध्कि जोखिमवाले ट्टण को 'अल्ट ए' श्रेणी का ट्टण कहा जाता है। इससे भी ज्यादा जोखिमवाले ट्टणों की ग्रेडिंग सब प्राइम श्रेणी में की जाती है। इसमें ट्टण लेनेवालों को उफंची ब्याज दरों का भार वहन करना होता है। इसकी वजह यह है कि इसमें ट्टण लेनेवालों के पिछले ट्टण रिकॉडोर्ं की जांच नहीं की जाती है, न ही उनसे ज्यादा कागजात की मांग की जाती है। इंटरनेट बुलबुले के पफटने के बाद इस संकट से बाहर निकलने के लिए पेफडरल ने हाउसिंग बुलबुला शुरू किया। इसमें निवेशक बैंकों को कापफी सस्ती दर पर ट्टण दिये गये। यह वह दौर था, जब आवास के मूल्य आकाश छू रहे थे। इस परिस्थिति में कोई भी अपने घर को गिरवी रख कर उस पर अध्कि ट्टण हासिल करता था और पिफर इस ऋण का घर बनाने में इस्तेमाल होता था। इस प्रकार घरों की उंफची कीमत होने के कारण इसमें भारी मुनाफा था। ठीक इसी समय कर्जदाता के लिए इसमें पफायदा ही था कि कर्जदार 'डिपफाल्टर' हो जाये, अर्थात खुद को कर्ज चुकाने में असमर्थ घोषित कर दे। ऐसे में बैंकों के लिए गिरवी रखे घर को बेच कर मुनाफा कमाना ज्यादा मुनाफे का सौदा था। परिणामस्वरूप इसमें भारी पैमाने पर सटट्ेबाजी एवं कर्जदाताओं की भरमार हो गयी। 2005 तक 635 अरब डॉलर से अध्कि के सब प्राइम लोन जारी किये गये थे। 2006 में इसमें 600 अरब डॉलर और जुड़ गये एवं 2007 में यह कुल 10 खरब डॉलर के बराबर हो गया। पूंजी बाजार में जिस तरह के निवेश पर जितना अध्कि जोखिम है उस पर उतना ही अध्कि मुनापफा है। सब प्राइम कर्जे भी कमोबेश ऐसे ही अध्कि जोखिमवाले कर्जे थे, जिन पर ब्याज दर कई मामलों में स्थायी नहीं थी, बल्कि बाजार की स्थिति के आधर पर निर्धरित होती थी। इसे 'एडजस्टेबल रेट मॉरगेट्ज (एआरएम) कहा जाता है। इसमें बाजार में ब्याज दर में कमी या वृद्धि के अनुसार कर्जदारों को ब्याज चुकाना पड़ता है। मॉरगेट्ज अपने आप में वास्तविक परिसंपत्ति का मूल्य व्यक्त करते हैं, जिस पर वे आधरित होते हैं-मसलन घर या पिफर अन्य चीजें जिन पर मारगेट्ज आधरित हो। लेकिन इन 'मॉरगेट्ज' को अन्य प्रकार के सिक्युरिटिज के साथ मिला कर एक नयी काल्पनिक वित्तीय परिसंपत्ति में पैकेजिंग की गयी, जिसे 'कोलैटरल डेब्ट ऑब्लिगेशन' (सीडीओ) कहा गया। इन सीडीओ की रेटिंग सब प्राइम श्रेणी के ट्टण से बेहतर श्रेणी 'अल्ट ए' श्रेणी में की गयी, अर्थात इसमें सब प्राइम श्रेणी के ऋण से कम जोखिम था। पिफर निवेशक बैंकों ने इस सीडीओ को 'हेज पंफडों', अमीर निवेशकों, निगमों तथा अन्य संस्थानों को बेचा। इस प्रकार निवेशक बैंकों के जोखिम अब सीडीओ के जरिये विभिन्न संस्थानों के बीच बांट दिये गये।

हाउसिंग बुलबुला फरवरी, 07 से फूटना शुरू हो गया। मसलन भारी पैमाने पर आवास में निवेश के लिए कर्जे की मांग में वृद्धि से ब्याज दर में भारी वृद्धि होती गयी, वहीं भारी पैमाने पर घरों के निर्माण से घरों की कीमत में गिरावट होती गयी। ध्ीरे-ध्ीरे घर खरीदने में उपभोक्ताओं की दिलचस्पी भी समाप्त होने लगी। इस प्रकार घरों की बिव्रफी न हो पाने की वजह से कर्जदाता कर्ज चुकाने में असमर्थ होने लगे। अपने पुराने घर पर मारगेट्ज ट्टण लेने की वजह से वे उसे भी नहीं बेच सकते थे। अब भारी पैमाने पर कर्जदारों ने खुद को 'डिपफॉल्टर' घोषित कर दिया। ऐसे में बैंकों के लिए भी भारी नुकसान हुआ, चूंकि घरों के दाम में भारी गिरावट एवं उपभोक्ताओं की घरों में दिलचस्पी समाप्त होने की वजह से भी इन घरों से बैंकों को कुछ खास हासिल होनेवाला नहीं था। इस उथल-पुथल की वजह से सब प्राइम मारगेट्ज बाजार 15 अगस्त, 07 को पूरी तरह ध्राशायी हो गया। इस सब प्राइम मॉरगेट्ज से बहुत सारे 'सीडीओ' भी जुड़े हुए थे। संकट की वास्तविक स्थिति का आकलन करना मुश्किल था, चूंकि इसके जोखिम को विभिन्न प्रकार के सीडीओ के बीच बांट दिया गया था। निवेशक अपने नुकसान का आकलन करना चाहते थे, लेकिन उनको इसका वास्तविक जवाब मिलना मुश्किल था। चूंकि यह बात स्पष्ट नहीं थी कि किस सीडीओ में कितना सब प्राइम ट्टण है। अब निवेशक स्वाभाविक रूप से अपना निवेश बेच कर नकद लेना चाहते थे। 2007 के अंत तक सब प्राइम के लिए बाजार खत्म हो गया था, इसलिए कोई खरीदार भी नहीं था। मतलब इन निवेशकों के लिए अपने निवेश का कोई मूल्य नहीं रह गया था और इन्हें भारी तबाही का सामना करना पड़ा। इस वर्तमान संकट में 9 हेज फंड पूरी तरह डूब गये। निवेशक बैंकों सहित अन्य वित्तीय संस्थानों को भी भारी नुकसान हुआ। दुनिया की अर्थव्यवस्था आज कितनी ज्यादा हवाई है, इसका अंदाजा हम इस बात से लगा सकते हैं कि आज 5000 खरब डॉलर से अध्कि की राशि 'डेरिवेटिव्स' में लगी हुई है, जबकि पूरी दुनिया का सकल घरेलू उत्पाद लगभग 500 खरब डॉलर एवं अमेरिका का सकल घरेलू उत्पाद 130 खरब डॉलर के बराबर है। दूसरे शब्दों में कहें तो 'डेरिवेटिव्स' कॉन्टै्रक्ट में लगी ध्नराशि एक साल में तमाम अर्थव्यवस्थाओं द्वारा पैदा किये गये मालों एवं सेवाओं के मूल्य से 10 गुणा अध्कि है। इस बात से हम आनेवाली तबाही का इंतजार भर कर सकते हैं।



कल पढियेअमेरिका को निमोनिया हो गया हैं

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सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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