हाशिया

बीच सफ़हे की लड़ाई

नदियाँ बिक रही हैं, रोज बिक रही हैं

Posted by Reyaz-ul-haque on 4/15/2008 10:20:00 PM
















सत्यभामा की समाधि


नदिया बिक गई पानी के मोल- 6


------------------------------------------
आलोक प्रकाश पुतुल
समापन किस्त सभी छः किस्तें यहाँ पढ़ें
------------------------------------------

किस्से सैकड़ों हैं

लेकिन नदियों पर निजी कब्जे की कहानी शिवनाथ, केलो और कुरकुट तक आ कर खत्म नहीं होती. राज्य के नक्सल प्रभावित बस्तर के दंतेवाड़ा की शबरी नदी का बड़ा हिस्सा एस्सार के कब्जे में है. दंतेवाड़ा से आंध्र प्रदेश के विजाक शहर तक एस्सार ने पाईपलाइन बिछा रखा है. इस पाईपलाइन में लौह अयस्क डालकर उसे दंतेवाड़ा से शबरी नदी के पानी के सहारे बिजाक तक पहुंचाने की योजना है.
रायपुर के खारुन नदी पर निको जायसवाल और मोनेट इस्पात नामक औद्योगिक घरानों के अपने बांध हैं. निको जायसवाल खारुन से 3 एमजीडी और मोनेट इस्पात 2 एमजीडी पानी लेता है. शिवनाथ नदी के 0.75 एमजीडी पानी पर लाफार्ज इंडिया का कब्जा है.

बजरंग इस्पात एंड पावर लिमिटेड, एस के एस इस्पात, मेसर्स साऊथ एशीयन एग्रो लिमिटेड जैसी कंपनियां अभी कतार में हैं, जिन्होंने यहां की नदियों पर अपना हक़ जमाने के लिए सरकार से अनुबंध कर रखा है.

और सरकार ?
पानी के मुद्दे पर कोई भी सरकारी अधिकारी या मंत्री बात करने के लिए तैयार नहीं है. अधिकांश अधिकारी इस पचड़े में नहीं पड़ना चाहते. सब फाइलों का हवाला देते हैं.

जाहिर है, सरकार अभी पानी और पानी की धार देख रही है.

(सीएसई की मीडिया फेलोशीप के तहत किए गए अध्ययन का हिस्सा)
समाप्त

Related Posts by Categories



Widget by Hoctro | Jack Book
  1. 2 टिप्पणियां: Responses to “ नदियाँ बिक रही हैं, रोज बिक रही हैं ”

  2. By अतुल on April 15, 2008 at 10:43 PM

    अरे भाई आपको नदियों की पड़ी है. यहां तो पूरा देश बिकता जा रहा है.

  3. By Reyaz-ul-haque on April 17, 2008 at 9:24 PM

    Sahi kaha bhai. nadiyan bik jayen, hawa-pani bik jaye, desh ke logon ke adhikar aur samprabhuta bik jaaye, sari sampada bik jaaye...kya fark padta hai.

    hamen sirf desh ke bikne par hi shok manana chahiye aur nadiyon ko, hawa-pani ko, kheton ko, logon ke adhikaron ko, samprabhuta aur sampada ko bikne dena chahiye.

    ...aur kuchh bhi ho, humen sirf shok hi manana chahiye, hai na Atul bhai?
    kuchh aur to hum kar hi nahin sakte, karna bhi nahin chahiye.

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


फीड पाएं


रीडर में पढें या ई मेल से पाएं:

अपना ई मेल लिखें :




हाशिये में खोजें