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बीच सफ़हे की लड़ाई

पानी पर सत्ता के खेल

Posted by Reyaz-ul-haque on 3/28/2008 04:34:00 PM

नदिया बिक गई पानी के मोल- 4

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आलोक प्रकाश पुतुल
चौथी किस्त पहले की तीन किस्तें यहाँ पढ़ें
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पानी पर सत्ता के खेल
नांनदोलनों से जब सरकार की नींद खुली तो छत्तीसगढ़ राज्य के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने 2 अप्रेल 2003 को घोषणा कि - “ रेडियस के साथ किया गया अनुबंध समाप्त किया जाएगा.पूरे मामले की जांच करवाई जाएगी और इसमें जो भी दोषी होगा, उस पर कार्रवाई होगी.”

लेकिन नहीं, यह सब केवल राजनीतिक बयान भर रह गया.

रेडियस वाटर पर कार्रवाई के बजाय रेडियस ने ही उल्टे आंदोलन करने वाले लोगों और इसकी खबर छापने वाले पत्रकारों पर मुकदमा दर्ज करना शुरु कर दिया. जनता की लड़ाई चलती रही.

इसके बाद 2003 में अगली सरकार भाजपा की बनी और उसने भी इस मामले में जल्दी कार्रवाई का आश्वासन दिया. लेकिन सत्ता का चरित्र एक जैसा होता है. हालत ये है कि इस पूरे मामले की जांच के लिए बनाई गई छत्तीसगढ़ विधान सभा की लोक लेखा समिति की रिपोर्ट को भी सरकार ने ठंढ़े बस्ते में डाल दिया.

लोक लेखा समिति ने 16 मार्च 2007 को राज्य विधानसभा में अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए सिफारिश की थी कि रेडियस वाटर लिमिटेड के साथ मध्य प्रदेश औद्योगिक केंद्र विकास निगम लिमिटेड रायपुर (वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम) के मध्य निष्पादित अनुबंध एवं लीज़-डीड को प्रतिवेदन सभा में प्रस्तुत करने के एक सप्ताह की अवधि में निरस्त करते हुए समस्त परिसम्पत्तियां एवं जल प्रदाय योजना का आधिपत्य छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकाल निगम द्वारा वापस ले लिया जाए.

सिफारिश में कहा गया था कि मध्य प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड एवं मध्य प्रदेश औद्योगिक केंद्र विकास निगम लिमिटेड, रायपुर के तत्कालीन प्रबंध संचालकों एवं मध्य प्रदेश राज्य औद्योगिक निगम लिमिटेड के मुख्य अभियंता के विरुद्ध षड़यंत्रपूर्वक शासन को हानि पहुँचाने, शासकीय सम्पत्तियों को अविधिमान्य रूप से दस्तावेजों की कूटरचना करते हुए एवं हेराफेरी करके निजी संस्था को सौंपे जाने के आरोप में प्रथम सूचना प्रतिवेदन कर उनके विरुद्ध अभियोजन की कार्यवाही संस्थापित की जाए और इस आपराधिक षडयंत्र में सहयोग करने और छलपूर्वक शासन को क्षति पहुँचाते हुए लाभ प्राप्त करने के आधार पर रेडियस वॉटर लिमिटेड के मुख्य पदाधिकारी के विरुद्ध भी अपराध दर्ज कराया जाए.

सिफारिश में कहा गया था कि मध्य प्रदेश औद्योगिक केंद्र विकास निगम लिमिटेड, रायपुर एवं जल संसाधन विभाग के तत्कालीन अधिकारी जिनकी संलिप्तता इस सम्पूर्ण षडयंत्र में परिलक्षित हो, इस संबंध में भी विवेचना कर उनके विरुद्ध भी कड़ी अनुशासनात्मक कार्यवाही एक माह की अवधि में आरंभ की जाए.

लोक लेख समिति ने यह भी कहा कि समिति द्वारा अनुशंसित सम्पूर्ण कार्यवाही सम्पादित करने की जिम्मेदारी सचिव स्तर के अधिकारी को सौंपते हुए शासन का हित रक्षण करने के लिए उत्कृष्ट विधिक सेवा प्राप्त करते हुए आवश्यकतानुसार न्यायालयीन प्रकियाओं में विधिक प्रतिरक्षण हेतु भी प्रयाप्त एवं समुचित कार्यवाही सुनिश्चित की जाए ताकि विधिक प्रतिरक्षण के अभाव में अथवा कमज़ोर विधिक प्रतिरक्षण के कारण शासन को अनावश्यक रूप से अलाभकारी स्थिति में न रहना पड़े.
लेकिन एक सप्ताह में रेडियस वाटर लिमिटेड और मध्य प्रदेश औद्योगिक केंद्र विकास निगम लिमिटेड रायपुर के समझौते को रद्द करने की कौन कहे, इस पूरे मामले में दिसंबर 2007 तक संबंधित सिफारिश के मामले में विधिक विमर्श की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो सकी.

लोकलेखा समिति के सदस्य और पानी के मामलों के जानकार विधायक रामचंद्र सिंहदेव कहते हैं- “यह संविधान का मजाक है. इससे भयावह कुछ नहीं हो सकता कि लोकलेखा समिति की रिपोर्ट को ठंढ़े बस्ते में डाल दिया जाए.”

शिवनाथ अब भी कब्जे में है. गाहे-बगाहे आंदोलन करने वाले लोग अपनी आवाज़ उठाते हैं और फिर उनकी आवाज़ पूंजी और भ्रष्टाचार के दरवाजों से होते हुए सत्ता के गलियारे में गुम हो जाती है.

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  1. 1 टिप्पणियां: Responses to “ पानी पर सत्ता के खेल ”

  2. By maithily on March 28, 2008 at 6:21 PM

    कोई उम्मीद बर नहीं आती
    कोई सूरत नज़र नहीं आती

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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