हाशिया

बीच सफ़हे की लड़ाई

इस ग़ैर मौजूदगी के लिए माफी

Posted by Reyaz-ul-haque on 12/09/2007 01:13:00 AM

साथियों, हम कुछ पोस्ट न कर पाने के लिए माफी चाहते हैं। कुछ कारणों से अभी यह ग़ैर मौजूदगी कुछ और दिनों (कुछ हफ्तों तक भी) चल सकती है। कुछ तो निजी व्यस्तताएं हैं और कुछ नेट की दिक्कतें भी।
हम बहुत जल्द हाजिर होंगे।

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  1. 3 टिप्पणियां: Responses to “ इस ग़ैर मौजूदगी के लिए माफी ”

  2. By बाल किशन on December 9, 2007 at 1:51 PM

    ठीक है. माफ़ी दी जा रही है. पर सनद रहे जल्द ही काम पर वापस आना है.

  3. By Reyaz-ul-haque on December 9, 2007 at 10:16 PM

    han, jarur.

    hum jaldi hi phir se maujood rahenge.

  4. By अजित वडनेरकर on December 11, 2007 at 5:15 AM

    अब यही दिक्कत है। एक तो हम आते नहीं और जब आते हैं तो कोई न कोई जंजाल...चलिए फिर देखते हैं ।

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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