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बीच सफ़हे की लड़ाई

कामरेड चल दिये राजा के घर : सुनिए अमिताभ का नया गीत

Posted by Reyaz-ul-haque on 11/15/2007 07:25:00 AM

अमिताभ ने अपने नये अलबम में जो कुल 8 गीत गाये हैं, उनमें से एक है यह गीत-कामरेड चल दिये राजा के घर. सिंगूर-नंदीग्राम की पृष्ठभूमि में लिखा गया यह गीत भाकपा-माकपा के शासकवर्ग के रूप में ढल जाने और उसकी दलाली करने को लेकर है.
सीपीम ने नंदीग्राम में जो किया है, और वह अब तक जो करती रही है, वह जनवाद की आकांक्षा रखनेवाले किसी भी व्यक्ति के लिए शर्मनाक है. और क्या आपने बुद्धदेव को सुना? वे कह रहे थे-नंदीग्राम के लोगों ने जैसा किया वैसा पाया. उनके समर्थन में उनकी पूरी पार्टी खडी़ है. शायद 2002 के गुजरात में भी इतनी निर्लज्जतापूर्ण बयान नहीं दिये गये थे.

आइए सुनते हैं अमिताभ को.







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  1. 3 टिप्पणियां: Responses to “ कामरेड चल दिये राजा के घर : सुनिए अमिताभ का नया गीत ”

  2. By दिलीप मंडल on November 15, 2007 at 9:12 AM

    बढ़िया गीत है भाई। नंदीग्राम लोकसंस्कृति में बसाने की चीज है। हाशिए में डाल दिए गए बहुमत की जीत का जश्न है नंदीग्राम। कोई भूल न जाए।

  3. By sunil on July 10, 2008 at 10:22 PM

    Reyaj bhai ye geet khul nahi raha hai.

  4. By vimal verma on November 26, 2009 at 12:05 PM

    रियाज़ भाई,इस गाने को फिर से चढ़ाइये.....नये प्लेयर का जल्द से जल्द इंतज़ाम करें....

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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