हाशिया

बीच सफ़हे की लड़ाई

कामरेड्स! इस शानदार विजय के लिए बधाई

Posted by Reyaz-ul-haque on 11/13/2007 12:33:00 AM
















नं
दीग्राम को फ़तह कर लिया गया.

यह बेशुमार फ़तहों का दौर है-बगदाद, काबुल और नंदीग्राम इसके अलग-अलग मोर्चे हैं, जिन्हें फ़तह किया गया है, फ़तह किया जा रहा है. सोमालिया और सूडान कुछ और मोर्चे हैं. तेहरान जैसे नये मोर्चे भी खुलनेवाले हैं. ये वे जगहें हैं जिन्हें मुक्त बाज़ार के हिरावल दस्ते ने मुक्त करा लिया है.

लाल झंडे लिये कामरेड्स बंगाल की सड़कों पर अपनी जीत का जश्न मनाने निकल पडे़ हैं.

हम विजेताओं को उनकी इस शानदार विजय पर बधाई और शुभकामनाएं देते हैं.


इस लडा़ई में हम 'पराजित' लोगों के साथ हैं.

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वह दूसरे की धरती को

जीतने नहीं जा रहा था
वह जा रहा था
अपनी ही धरती को मुक्त करने
उसका नाम कोई नहीं जानता
पर इतिहास की पुस्तकों में
उनके नाम हैं
जिन्होंने उसे मिटा दिया

वह मनुष्य की तरह जीना चाहता था
इसीलिए एक जंगली जानवर की तरह
उसे जिबह कर दिया गया

उसने कुछ कहा था
फंसी-फंसी आवाज में
मरने से पहले
क्योंकि उसका गला रेता हुआ था
पर ठंडी हवाओं ने उन्हें चारों ओर फैला दिया
उन हजारों लोगों तक
जो ठंड से जकड़ रहे थे.


इस लडाई में, विश्व बैंक, अमेरिकी धन्नासेठों और वैश्विक बाज़ार के लिए हुए इस कत्लेआम में मारे गये लोगों की याद में ब्रेष्ट की कविता के अंश.

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  1. 4 टिप्पणियां: Responses to “ कामरेड्स! इस शानदार विजय के लिए बधाई ”

  2. By परमजीत बाली on November 13, 2007 at 2:01 AM

    बहुत बढिया रचना प्रेषित की है।

  3. By Mrs. Asha Joglekar on November 13, 2007 at 2:49 AM

    इतनी अच्छी रचना पढाने के लिये धन्यवाद ।

  4. By अभय तिवारी on November 13, 2007 at 5:23 AM

    इतनी ज़बरद्स्त कविता को पढ़ने का यही सही अवसर है..

  5. By पंकज सुबीर on November 13, 2007 at 7:45 AM

    नंदी ग्राम को लेकर कवि जो कह सकता है वो आपने कहा है कवि वही होता है जो हर किसी पर लिखे उन पर भी जो इस यहां हैं और उन पर भी जो वहां हैं । बधाई

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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