हाशिया

बीच सफ़हे की लड़ाई

ये चेहरे भी हमारी ही दुनिया के हैं

Posted by Reyaz-ul-haque on 10/12/2007 05:36:00 AM

लालिमा ने अपने ब्लाग पर इनमें से कुछ तसवीरें एक अलबम के रूप में पोस्ट कीं तो देख कर रोंगटे खडे़ हो गये. अविश्वसनीय-सी लगनेवाली ये तसवीरें हमारे ही समय की हैं-किसी और समय की नहीं और हमारे ही मुल्कों की हैं. जब हम अंतरराष्ट्रीयतावाद की बात कर रहे होते हैं तो हमारे लिए पूरी दुनिया एक मुल्क की तरह होती है. और ये तसवीरें उसी दुनिया का चेहरा हैं-असली और खरा चेहरा-जिसमें एक खास फोन नंबर हासिल करने के लिए 15 लाख रुपये फूंके जा सकते हैं.

सोचा कि इन्हें थोडा और बेहतर ढंग से पेश किया जाये. और फिर जो सामने आया वह ये वीडियो है. पीछे बजनेवाले एक गीत की जगह इंतेसाब ने ली-तो फिर उसकी लेंथ के हिसाब से कुछ और फोटो डाले गये-इनमें से दो एक ब्लागर साथी के ब्लाग से लिये गये. गीत एक दूसरे ब्लागर साथी के यहां से.
आप भी देखें, और...अपनी राय ज़रूर दें. बस एक ध्यान रखें-इस वीडियो का मुख्य उद्देश्य फोटोग्राफ्स दिखाना है. कहीं-कहीं गीत के साथ फोटो का मेल नहीं भी होगा.

और फिर मिलते हैं चार-पांच दिनों की छुट्टी के बाद.

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  1. 6 टिप्पणियां: Responses to “ ये चेहरे भी हमारी ही दुनिया के हैं ”

  2. By अनिल रघुराज on October 12, 2007 at 7:53 AM

    रेयाज़ भाई, देश-दुनिया की हृदय विदारक हकीकत।

  3. By Sagar Chand Nahar on October 12, 2007 at 12:55 PM

    रियाज भाई बहु ही दुखद: है यह सब देखना, आफ विश्वास नहीं करेंगे; आँख से आँसु निकल गये हैं।
    परन्तु सच्चाई से मुँह भी तो नहीं मोड़ा जा सकता।
    मैने भी इस तरह की एक पोस्ट लिखी थी एक बार अवश्य देखिये।
    क्या आपको जीवन के अभावों से शिकायत है?

  4. By पूनम मिश्रा on October 13, 2007 at 11:21 AM

    नि:शब्द हूँ इनको देखने के बाद.क़ुछ भी कहने में असमर्थ .

  5. By manjula on December 20, 2007 at 5:25 PM

    Reyaz ji maine yeh video apne orkut profile mei lagaya hai. Apki ijajat nahi li. Mujhe laga aur bhi jyada logo ki nazar mei aana chahiye. Akhir kis dunia mei rahte hai ham. logo ko pata to chale.

  6. By Reyaz-ul-haque on December 24, 2007 at 5:12 PM

    manjula ji
    kisi bhi ijazat ki kabhi koi zarurat nahin hai. apko shukriya ki apne yah vedio apne orkut men lagay.

  7. By dilip gupta on June 17, 2008 at 9:24 PM

    hamare samay ka katu yatharth.samrajaywad ka bidrup chehra.

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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