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बीच सफ़हे की लड़ाई

पाल रोबसन का गीत और गंगा बहती हो क्यों

Posted by Reyaz-ul-haque on 9/22/2007 01:24:00 AM

युनूस भाई ने कुछ समय पहले भुपेन हज़ारिका का मशहूर गीत गंगा पोस्ट किया तो याद आया कि जन संघर्षों और सर्वहारा के महान गायक पाल रोबसन ने एक गीत गाया था आ'ल मेन रिवर. गंगा इसी गीत का भारतीय संस्करण है. लीजिए आज सुनिए, खुद भाई पाल रोबसन की आवाज़ में उनका वह मशहूर गीत. इसी के साथ देखिए भुपेन हज़ारिका को गंगा गाते हुए. नीचे भुपेन दा की ही आवाज़ में सुनिए गंगा. इसे उनके अलबम से लिया गया है. अलबम भाई संजीत ने उपलब्ध कराया जिसके लिए हम उनके आभारी हैं.







पाल रोबसन





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भुपेन हज़ारिका




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गंगा








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  1. 3 टिप्पणियां: Responses to “ पाल रोबसन का गीत और गंगा बहती हो क्यों ”

  2. By vimal verma on September 22, 2007 at 10:06 AM

    जब अलाहाबाद मॆं था तो बहुत सुना था भूपेनजी को . ए दोला ए दोला तो हम अपने ग्रुप में गया करते थे. अच्छा लगा शुक्रिया.

  3. By yunus on September 22, 2007 at 10:28 AM

    वाह । बेहतरीन प्रस्‍तुति । मैंने इस पोस्‍ट का लिंक भूपेन हजारिका वाली पोस्‍ट पर चढ़ा दिया है । सही मायनों में
    दोनों को मिलकर पढ़ा जाये तभी संतुष्टि का अहसास हो सकेगा ।
    मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि भूपेन दा ने ऑल मेन रिवर की प्रेरणा तो ली लेकिन इस रचनात्‍मक प्रेरणा ने दिखला
    दिया कि नकल और प्रेरणा में कितना फ़र्क़ है । आगे चलकर हम आपको बतायेंगे कि फिल्‍म संसार के संगीतकार
    कई बार कितने उठाईगीर हो जाते हैं । इस बारे में हमारी तैयारियां चल रही हैं ।

  4. By Reyaz-ul-haque on September 22, 2007 at 11:56 AM

    सही कहा yunus भाई. गंगा को नकल तो कहा ही नहीं जा सकता. प्रेरणा वास्तव में इसे ही कहते हैं. हिंदी फ़िल्मवाले जिस तरह इस शब्द का इस्तेमाल करते हैं वह हास्यास्पद लगता है. बाइस्कोप की बातों का श्रोता रहा हूं इसलिए पता है किस फ़िल्मकार ने किससे प्रेरणा ली.

    इंतज़ार है आपकी तैयारी पूरी होने की. इत्तेफ़ाक है कि हमारी एक साथी ने कई ऐसे गीत कल ही हमें सुनवाये जो सीधे-सीधे अंगरेज़ी गीतों की नकल थे. हमने अंगरेज़ी के वे मूल गीत भी सुने और सिर पीटते रहे. अगर आप अपनी पोस्ट में मूल गीत और नकल दोनों को प्रस्तुत कर दें तो सोने पे सुहागा.

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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