हाशिया

बीच सफ़हे की लड़ाई

...प्यार के गीत गा उठें सभी

Posted by Reyaz-ul-haque on 8/20/2007 01:24:00 AM

अभिव्यक्ति में 11 गाने हैं. कल उसमें से एक गीत पोस्ट किया था, अमिताभ का गाया हुआ. इसी अलबम से एक और गीत, जो मुझे बहुत पसंद है. इसे नेहा ने गाया है. नेहा संभवतः दिल्ली में रहती हैं. संगीत पंकज आयंदे और राणा बनर्जी का है.









समीर लाल जी ने गीत डाउनलोड करने का लिंक मांगा है. मैं कोशिश कर रहा हूं कि पूरा अलबम ही नेट पर डाल दूं. तब तक गीत का मजा लीजिए.

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  1. 1 टिप्पणियां: Responses to “ ...प्यार के गीत गा उठें सभी ”

  2. By Udan Tashtari on August 20, 2007 at 5:44 PM

    बहुत आभार रेयाज भाई.

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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