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बीच सफ़हे की लड़ाई

नंदीग्राम नरसंहार के साक्ष्य

Posted by Reyaz-ul-haque on 3/24/2007 03:19:00 AM


गुजरात में जब दंगे हुए तो उसके पहले नरेंद्र मोदी ने नरसंहार की पूरी योजना बनायी थी और इसकी तैयारी कई महीनों से चल रही थी. नंदीग्राम पर आज एक जांच टीम की रिपोर्ट आयी है, जिसने यह कहा है कि नंदीग्राम के नरसंहार की पूरी तैयारी पहले से चल रही थी और सरकार में बैठे उच्चाधिकारियों के स्तर पर इसकी पूरी योजना बनायी गयी थी. ऐसी स्थिति में उन


अधिकारियों को मुख्यमंत्री बुद्धदेव की अनुमति भी लेनी पडी़ होगी जो गृह मंत्रालय देखते हैं. इसमें कहा गया है कि जिस तरह की घटनाएं 14 मार्च को घटीं और उसके बाद जो हुआ उसको देखें तो सीपीएम और पुलिस की मिलीभगत साफ़ दिखती है. रिपोर्ट में पीड़ितों से बातचीत दी गयी है और यह बताया गया है कि किस तरह की कयामत टूट पड़ी थी नंदीग्राम पर. इसे तैयार किया है एडीपीआर, पीबीकेएमएस आदि ने . इन संगठनों ने कोलकाता उच्च न्यायालय में इस मामले में 15 मार्च को एक याचिका दाखिल की थी जिस पर कार्रवाई हो रही है.
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  1. 0 टिप्पणियां: Responses to “ नंदीग्राम नरसंहार के साक्ष्य ”

सुनिए : ऐ भगत सिंह तू जिंदा है/कबीर कला मंच


बीच सफ़हे की लड़ाई


“मुझे अक्सर गलत समझा गया है। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मैं अपने देश को प्यार करता हूँ। लेकिन मैं इस देश के लोगों को यह भी साफ़ साफ़ बता देना चाहता हूँ कि मेरी एक और निष्ठा भी है जिस के लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ। यह निष्ठा है अस्पृश्य समुदाय के प्रति जिसमे मैंने जन्म लिया है। ...जब कभी देश के हित और अस्पृश्यों के हित के बीच टकराव होगा तो मैं अस्पृश्यों के हित को तरजीह दूंगा। अगर कोई “आततायी बहुमत” देश के नाम पर बोलता है तो मैं उसका समर्थन नहीं करूँगा। मैं किसी पार्टी का समर्थन सिर्फ इसी लिए नहीं करूँगा कि वह पार्टी देश के नाम पर बोल रही है। ...सब मेरी भूमिका को समझ लें। मेरे अपने हित और देश के हित के साथ टकराव होगा तो मैं देश के हित को तरजीह दूंगा, लेकिन अगर देश के हित और दलित वर्गों के हित के साथ टकराव होगा तो मैं दलितों के हित को तरजीह दूंगा।”-बाबासाहेब आंबेडकर


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