केन सारो वीवा की कविताएं
Written by Reyaz-ul-haque on 3/18/2007 01:30:00 AM
केन सारो वीवा नाइजीरियाइ जनता के महान कवि थे. सारो वीवा एक कवि होने के साथ टीवी प्रोड्युसर और पर्यावरण कार्यकर्ता थे. उन्होंने अपने कुछ साथियों के साथ मिल कर 'ओगोनी के लोगों के बचाव' के लिए एक आंदोलन चलाया था, जिसका उद्देश्य शेल नामक कंपनी की लूट से अपने लोगों को बचाना था. उनकी मुख्य मांग थी कि लोगों को आज़ादी दी जाये, तेल की बिक्री से हो रही आय में से स्थानीय लोगों को हिस्सा मिले और स्थानीय भाषा क प्रयोग करने का अधिकार हो. इस तेल कंपनी के कारण वहां के लोगों और पर्यावरण को खतरा पैदा हो गया था. जब आंदोलन बढा तो वहां सरकार ने सेना को लगा दिया और 1994 की गर्मियों में 30 गांवों को पूरी तरह खत्म कर दिया गया. लाखों लोगों को उनके घरों से खदेड दिया गया. अंतत: 10 नवंबर, 1995 को उनके आठ अन्य साथियों के साथ केन को फांसी पर लटका दिया गया. इस तरह सरकार ने कंपनियों के हित में अपने लोगों को तबाह कर के रख दिया. आज हम यही स्थिति बंगाल के नंदीग्राम में देखते हैं. पेश हैं केन की उनकी दो कविताएं. ये जेल में लिखी गयी थीं.
केन सारो वीवा
वास्तविक जेलखाना
यह चूती हुई छत नहीं
न ही सीलनदार घिनौने सेल में
गाते हुए मच्छर
वार्डर जब तुम्हें अंदर बंद करता है
उसकी चाबियों की झनझनाहट नहीं.
यह दिनभर का राशन नहीं
जो आदमी या पशु
किसी के लिए भी अनुपयुक्त है
न ही रात के कालेपन में अभी तक
डूबते हुए दिन का खालीपन
यह नहीं
यह नहीं
यह नहीं
यह झूठ है
एक पीढी से
जिसका ढोल आपके कानों में पीटा गया.
यह एक जून घटिया खाने के बदले
निर्दय दुखद आदेशों को कार्यान्वित करने के लिए
पागलपन के साथ आपधापी मचा रहे सुरक्षा एजेंट
यह जानते हुए भी अपनी किताब में
सज़ा लिख रहा है न्यायाधीश
कि वह नाजायज़ है
नैतिक जर्जरपन
मानसिक अयोग्यता
तानाशाही की नकली वैध्यता प्रदान करती है
कायरपन आग्याकारिता का नकाब ओढ
हमारी काली आत्मा में छिपा बैठा है
डर जो पतलून भिगो दे रहा है
हम अपना पेशाब धोने की हिम्मत नहीं कर
रहे हैं
यह यह
यह यह
यह यह
प्यारे दोस्तो, हमारी इस मुक्त दुनिया को
एक नीरस जेलखाने में बदल देता है.
ओगोनी ओगोनी
ओगोनी
मेरी धरती, मेरे लोग
मेरी ओगोनी
पुरखों के बाग-बगीचे में
मरते पेडों की दारुण व्यथा
सही नहीं जाती
झरने प्रदूषित हो चुके हैं
रो रहे हैं
नदियां विलाप कर रही हैं
उनमें गाद भर गयी है
हवा में ज़हर भर दिया गया है
जिससे बच्चों का दम घुटता है
उनके फेफडे सांस नहीं ले पाते
ओगोनी
जो हमारा सपना है
स्तब्ध है उसकी धरती
शेल कंपनी की करतूतों से
हतोत्साह
जंज़ीरों में जकडी हुई.
दक्षिणपूर्वी नाइजर डेल्टा क्षेत्र में ओगोनी लोग रहते हैं.
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